इसराइल पर लगे गंभीर आरोप, लगभग 800 फलस्तीनी लोगों के शव रोकने का दावा.

हाल ही में सामने आई एक बड़ी रिपोर्ट के अनुसार, इसराइल पर लगभग 800 फलस्तीनी लोगों के शव अपने कब्जे में रखने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस मामले में मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय अभियानों ने चिंता जताई है कि इन शवों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि इसराइली हिरासत में रखे गए कुल लोगों की संख्या 1,700 तक हो सकती है। यह जानकारी नेशनल कैंपेन टू रीट्रीव बॉडीज द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के आधार पर सामने आई है। इस पूरे मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से मानवीय नियमों और कानूनों को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है, जहां आम लोग और मानवाधिकार संगठन मृतकों के सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की मांग कर रहे हैं।
शवों के आंकड़े और कैंपेन की जानकारी
इस अभियान के समन्वयक हुसैन शुजाइया ने बताया कि वर्तमान में 776 शवों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इनमें 77 बच्चे, 10 महिलाएं और बंधक आंदोलन से जुड़े 96 लोग शामिल हैं। इसके अलावा, इनमें से 256 शवों को कब्रों में दफनाया गया है जिन्हें नंबरों वाली कब्रें कहा जाता है। वहीं, साल 2015 में इस नीति के दोबारा शुरू होने के बाद से 544 शवों को रोक कर रखा गया है। इन तमाम आंकड़ों के सामने आने के बाद फलस्तीनी नागरिकों में भारी रोष देखने को मिला है, जिसके चलते लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
वेस्ट बैंक और गाजा में प्रदर्शन और विरोध
बीते दिन 26 अगस्त 2026 को वेस्ट बैंक के कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग इन शवों को तुरंत उनके परिवारों को वापस सौंपने की थी, ताकि उनका सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया जा सके। इसके साथ ही, नेशनल कैंपेन फॉर द रिकवरी ऑफ मार्टर्स बॉडीज ने इसराइली सेना की कड़ी निंदा की है। उनका आरोप है कि सेना ने गाजा पट्टी के अलग-अलग कब्रिस्तानों से 250 से ज्यादा शवों को बाहर निकाला और उनके साथ बेअदबी की। इन घटनाओं ने युद्धग्रस्त इलाके में मानवीय संकट को और अधिक गहरा कर दिया है, जहां जीवित लोगों के साथ-साथ मृतकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार संगठनों की आपत्तियां
अदालत और अल-मीजान सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स सहित कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह पूरी नीति अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का साफ उल्लंघन है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार यह अनिवार्य है कि मृतकों के साथ पूरी गरिमा के साथ पेश आया जाए और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जाए ताकि वे पारंपरिक और सम्मानजनक तरीके से उनका अंतिम संस्कार कर सकें। ये तमाम चिंताएं संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्टों से भी मेल खाती हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट जो 14 अगस्त 2026 को आई थी, उसमें भी इसराइल पर गाजा पट्टी में नरसंहार करने का गंभीर आरोप लगाया गया था। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र की समिति ने भी फलस्तीनी लोगों के साथ बड़े पैमाने पर हो रहे दुर्व्यवहार की खबरों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।