इसराइल में वेस्ट बैंक के शिक्षकों की एंट्री बैन, ईस्ट यरुशलम के स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित और हड़ताल शुरू.

इसराइल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे तनाव का असर अब सीधे तौर पर स्कूली शिक्षा पर भी दिखने लगा है। 1 सितंबर 2026 को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही ईस्ट यरुशलम के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी देखने को मिली, क्योंकि इसराइली अधिकारियों ने वेस्ट बैंक के शिक्षकों को शहर में आने से रोक दिया। इस रोक के बाद कई निजी और ईसाई स्कूलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर संकट मंडरा रहा है।
प्रवेश अनुमति रद्द होने से गहराया संकट
इसराइली प्रशासन द्वारा 70 से अधिक शिक्षकों के एंट्री परमिट को नवीनीकृत न किए जाने के कारण यह पूरा संकट और ज्यादा गहरा गया। जानकारों के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 के बाद से इन एंट्री परमिट्स को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया था, जिससे शिक्षक अपने काम पर नहीं लौट पा रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए स्कूलों के सामने स्टाफ की भारी कमी खड़ी हो गई है, जिसका सीधा असर हजारों बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
पाठ्यक्रम में बदलाव और नया कानून
शिक्षकों की रोक के साथ-साथ इसराइल ने फिलिस्तीनी छात्रों के लिए अपने पाठ्यक्रम का विस्तार भी कर दिया है। 2 सितंबर 2026 से ईस्ट यरुशलम में 45,000 से अधिक फिलिस्तीनी छात्र इसराइली पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इस नए चरण में इसराइली नगरपालिका द्वारा संचालित सरकारी स्कूलों की पहली और सातवीं कक्षा के छात्रों को शामिल किया गया है। यह नीति जनवरी 2026 के एक केनसेट कानून के तहत लागू की गई है, जिसे फरवरी में अमल में लाया गया था। इस कानून के तहत फिलिस्तीनी प्राधिकरण से जुड़ी संस्थाओं की डिग्री वाले शिक्षकों को काम पर रखने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय चिंता
फिलिस्तीनी यरुशलम गवर्नरट के प्रवक्ता मारूफ अल-रिफाई ने इस पाठ्यक्रम में बदलाव को साल 1967 के बाद का सबसे बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीनी इतिहास और राष्ट्रीय पहचान को पूरी तरह से खत्म करना है। फिलिस्तीनी शिक्षा मंत्रालय और कैबिनेट ने इस मामले में तुरंत अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है और चेतावनी दी है कि इन संयुक्त उपायों से 50,000 से अधिक छात्रों की शिक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्च के महासचिव प्रोफेसर डॉ. जेरी पिल्ले ने भी इस परमिट प्रणाली की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।
दूसरी ओर, इसराइली रक्षा मंत्रालय की इकाई COGAT ने 1 सितंबर 2026 को एक बयान जारी कर बड़े पैमाने पर परमिट खारिज किए जाने के दावों को खारिज कर दिया है। एजेंसी का दावा है कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले मानक सुरक्षा और पात्रता की समीक्षा के बाद सभी योग्य शिक्षकों को उनके तय परमिट जारी कर दिए गए थे।