इजराइल में 27 अक्टूबर को होंगे चुनाव, पांच प्रमुख नेताओं ने फिलिस्तीन और बस्तियों पर रखी अपनी राय.

इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहे हैं, जिसमें 26वीं नेसेट के सभी 120 सदस्यों को चुना जाएगा। यह चुनाव 17 जुलाई 2026 को 25वीं नेसेट के कार्यकाल पूरा होने और उसके भंग होने के बाद हो रहे हैं। इस चुनाव को लेकर इजराइल की आधिकारिक नेसेट वेबसाइट पर पूरी जानकारी दी गई है, जहां पांच प्रमुख नेता फिलिस्तीन के राज्य और इजरायली बस्तियों के विस्तार पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और जनता के सामने अपने विचार रख रहे हैं।
नेतन्याहू और अन्य नेताओं का रुख
लिकुड पार्टी के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू फिलिस्तीन राष्ट्र का विरोध करते हैं और वेस्ट बैंक को यहूदी लोगों की ऐतिहासिक भूमि बताते हैं। उनका कैंपेन विदेशी दखलअंदाजी के आरोपों पर केंद्रित है, जहां उनकी पार्टी ने फिलिस्तीनी अधिकारी मोहम्मद दहलान पर 7 अक्टूबर 2023 के हमले से पहले मिली चेतावनियों की मीडिया रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया है और आपराधिक जांच की मांग की है। नेतन्याहू का कहना है कि इजराइल गाजा से पीछे नहीं हटेगा, जहां उसका अभी 60 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण है और वे ई1 जैसी बस्तियों की योजनाओं का समर्थन करते हैं।
टुगेदर पार्टी के नफ्ताली बेनेट भी फिलिस्तीनी राज्य के बड़े विरोधी हैं। उन्होंने 6 सितंबर 2026 को बेशेवा कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वह किसी भी जमीन को छोड़ने के खिलाफ हैं और वेस्ट बैंक के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से को अपने देश में मिलाने की बात करते हैं। यशार पार्टी के गादी ईसेनकोट भी फिलिस्तीनी राज्य के खिलाफ हैं और जॉर्डन घाटी और बस्ती ब्लॉकों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने ई1 में निर्माण को एक गलती बताया है, लेकिन इस नीति को पूरी तरह खत्म करने का वादा नहीं किया है।
ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के नेता बेनी गैंट्ज़ का कहना है कि फिलिस्तीनी राज्य की बात करना सुरक्षा की असलियत से दूर है और इससे आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यिसराइल बीटेनु पार्टी के अविग्दोर लिबरमैन 'लिबरमैन प्लान' का समर्थन करते हैं, जिसके तहत क्षेत्रों की अदला-बदली और बड़े बस्ती ब्लॉकों को अपने में मिलाए जाने की बात कही गई है।
राजनीतिक गतिरोध और अंतरराष्ट्रीय दबाव
राजनीतिक माहौल में अभी भी गतिरोध बना हुआ है और किसी भी गुट के पास बहुमत का साफ रास्ता नहीं है। सरकारी चुनाव पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार चुनावों की पारदर्शिता को लेकर लोगों में चिंता है, जहां इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के एक पोल में 70 प्रतिशत यहूदी इजराइलवासी चुनाव के तरीके को लेकर चिंतित दिखे हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा द्वारा अवैध इजरायली बस्तियों के सामान पर प्रतिबंध लगाने के बाद, इजराइल ने भी कड़े कदम उठाए हैं। इजराइल ने जेरूसलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद कर दिया है और फिलिस्तीनी प्राधिकरण सुरक्षा बलों को मिलने वाली ब्रिटेन की ट्रेनिंग को रोक दिया है। इसके अलावा 9 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीनी दूत ने बस्तियों के विस्तार के खिलाफ और अधिक अंतरराष्ट्रीय कदम उठाने की मांग की है।