Israel News: इसराइल के वित्त मंत्री ने की ब्रिटिश राजदूत को देश से बाहर निकालने की मांग, मचा राजनीतिक बवाल

सोमवार, 7 सितंबर 2026 को इसराइल की राजनीति में उस وقت भूचाल आ गया जब वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने सार्वजनिक तौर पर ब्रिटेन के राजदूत डेविड क्वारे को देश से तुरंत बाहर निकालने की मांग रख दी। धार्मिक जियोनिज्म पार्टी का नेतृत्व करने वाले स्मोट्रिच ने ब्रिटिश सरकार को यहूदी विरोधी और कट्टर इस्लाम से प्रभावित देश करार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इसराइल ऐसी नीतियों के सामने कभी भी अपने पैरों की धूल नहीं बनेगा और इसराइली जमीन पर पुराना ब्रिटिश जनादेश अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। मंत्री ने ब्रिटेन पर आरोप लगाया कि वह सामाजिक और आर्थिक पतन से बचने के लिए इसराइल को निशाना बना रहा है।
ब्रिटेन का नया व्यापार प्रतिबंध और कूटनीतिक तनाव
यह पूरा कूटनीतिक विवाद उस रिपोर्ट के बाद सामने आया जिसमें बताया गया कि ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को इसराइल के साथ संबंधों को नए सिरे से शुरू करने की घोषणा करने वाले हैं। इस नई नीति के तहत वेस्ट बैंक की इसराइली बस्तियों से आने वाले सामानों और चुनिंदा सेवाओं के व्यापार पर पूरी तरह रोक लगाई जानी है। ब्रिटेन का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ये बस्तियां अवैध हैं। यह नीतिगत बदलाव यरुशलम द्वारा E1 क्षेत्र में बस्तियों के बड़े पैमाने पर विस्तार की योजनाओं और बसने वालों से जुड़ी हिंसा पर चिंता जताए जाने के बाद आया है, जो अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की 2024 की सलाहकार राय के अनुकूल है।
इसराइली मंत्रियों की तीखी प्रतिक्रिया और अन्य देशों की कूटनीति
ब्रिटेन के इस कदम पर इसराइल सरकार के अन्य मंत्रियों ने भी कड़ी आपत्ति जताई। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गविर ने सुझाव दिया कि इसराइल को बदले में फॉकलैंड द्वीप समूह को कब्जे वाले अर्जेंटीना के क्षेत्र के रूप में मान्यता देनी चाहिए और ब्रिटेन पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, विदेश मंत्री गिदिओन साआर ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ब्रिटेन इसराइल की चुनाव प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश कर रहा है और इस पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। जैसे-जैसे यह तनाव बढ़ रहा है, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बरहम ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बातचीत की। इस चर्चा का उद्देश्य ब्रिटेन के इस नीतिगत बदलाव को सही ठहराना था, जो दो-राज्य समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के समर्थन पर जोर देता है। इस आधिकारिक घोषणा से ठीक पहले मंगलवार की सुबह वेस्टमिंस्टर हॉल में यहूदी सुरक्षा को लेकर एक संसदीय बहस भी आयोजित की जानी है।