इजरायली सेना ने अली अल-ताहेर हाइट्स से पीछे खींचे कदम, भूमिगत सुरंग नेटवर्क को किया पूरी तरह तबाह.

इजरायल की सेना ने 11 सितंबर 2026 को लेबनान के अली अल-ताहेर हाइट्स क्षेत्र से अपनी सेना को पीछे हटाने का बड़ा फैसला किया है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद सैनिकों को ब्यूफोर्ट इलाके में पीछे की पंक्तियों में तैनात कर दिया गया है। हालांकि सेना ने इस इलाके से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं, लेकिन इसके बावजूद इजरायल डिफेंस फोर्सेस यानी IDF इस पूरे पहाड़ी क्षेत्र पर अपनी पूरी अग्नि नियंत्रण यानी फायर कंट्रोल बनाए रखेगी। सेना पूरी तरह से मुस्तैद है ताकि यदि भविष्य में हिजबुल्लाह के लड़ाके इस इलाके में दोबारा वापस लौटने की कोई भी कोशिश करते हैं, तो उन्हें तुरंत रोका जा सके और करारा जवाब दिया जा सके।
दो दशक पुराना ढांचा और ईरान का समर्थन
यह पूरा सैन्य घटनाक्रम एक बड़े और सुनियोजित ऑपरेशन के बाद सामने आया है, जिसके तहत हिजबुल्लाह की अली अल-ताहेर रिज के नीचे बनी गुप्त और भूमिगत बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने 11 सितंबर 2026 को जारी एक संयुक्त बयान में इस बात की आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस विशेष सैन्य अभियान ने पहाड़ी के ऊपर और नीचे दोनों ही हिस्सों पर पूरी तरह से अपना ऑपरेशनल कंट्रोल हासिल कर लिया है। अधिकारियों ने मीडिया को दी जानकारी में बताया कि यह नष्ट किया गया नेटवर्क कोई छोटा-मोटा ढांचा नहीं था, बल्कि इसे पिछले दो दशकों में ईरान की आर्थिक मदद और गहरी योजना के तहत तैयार किया गया था। यह गुप्त नेटवर्क हिजबुल्लाह की बेहद खतरनाक और कुलीन 'बद्र' यूनिट के लिए एक मुख्य कमांड सेंटर के रूप में काम कर रहा था।
सुरंगों का जाल और भारी मात्रा में हथियार बरामद
इस बड़े ऑपरेशन के दौरान इजरायली सैनिकों ने सुरंगों के दो मुख्य रास्तों को पूरी तरह से खाली कराया, जहां हिजबुल्लाह के कई ऑपरेटिव छिपे हुए थे। मुठभेड़ के दौरान कुछ ऑपरेटिव मारे गए जबकि बचे हुए लोग अपनी जान बचाकर वहां से पीछे हट गए। रिपोर्ट्स से यह बात सामने आई है कि यह पूरा भूमिगत परिसर दो किलोमीटर से भी ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ था। इसके अंदर ईरान में बने दर्जनों रॉकेट, मिसाइल और मानवरहित हवाई वाहन यानी यूएवी रखे हुए थे। इसके अलावा वहां भारी मात्रा में मशीन गन, एंटी-टैंक मिसाइलें और सैकड़ों की संख्या में बारूदी सुरंगे तथा विस्फोटक उपकरण भी बरामद किए गए। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, IDF ने 5.4 किलोमीटर से अधिक लंबी सुरंगों को जमींदोज करने के लिए 1,100 टन से अधिक विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया। इस भारी-भरकम धमाके से एक शक्तिशाली भूकंपीय झटका महसूस किया गया, जिसे इजरायल के नेशनल जियोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ने भी रिकॉर्ड किया था।
युद्धविराम और कूटनीतिक प्रयास
देश के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने इससे पहले 4 सितंबर 2026 को एक बयान में स्पष्ट किया था कि इजरायल तब तक इस सुरक्षा क्षेत्र को अपने कब्जे में रखेगा जब तक कि पूरे लेबनान से हिजबुल्लाह को पूरी तरह से हथियारहीन नहीं कर दिया जाता और गैलील क्षेत्र पर मंडरा रहे खतरों को पूरी तरह से खत्म नहीं कर दिया जाता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस भूमिगत नेटवर्क का नष्ट होना देश की सुरक्षा के लिहाज से कितना बड़ा कदम है। यह पूरा सैन्य अभियान जून महीने में घोषित किए गए युद्धविराम के बावजूद जारी तनाव के बीच सामने आया है। इससे पहले इस क्षेत्र को लेबनानी सशस्त्र बलों को सौंपने की संभावना को लेकर लेबनानी अधिकारियों के साथ अमेरिका की मध्यस्थता में कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है।