Israel: भारतीय दूतावास ने हाइफा की लड़ाई के वीरों को किया याद, मेजर दलपत सिंह की शहादत को किया नमन

इजराइल के तेल अवीव में स्थित भारतीय दूतावास ने हाइफा नगरपालिका के साथ मिलकर प्रथम विश्व युद्ध के ऐतिहासिक Battle of Haifa के दौरान अपनी जान कुर्बान करने वाले जोधपुर और मैसूर लांसर्स के जांबाज सैनिकों की बहादुरी को याद किया है। यह कार्यक्रम हर साल की तरह इस बार भी उन वीर सैनिकों के सम्मान में आयोजित किया गया जिन्होंने 23 September 1918 को अपनी असाधारण वीरता का परिचय देते हुए हाइफा शहर को आज़ाद कराया था। इस खास मौके पर इजराइल में भारत के राजदूत JP Singh ने हाइफा कब्रिस्तान में जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और जोधपुर लांसर्स के कमांडर Major Thakur Dalpat Singh की याद में फूल मालाएं समर्पित कीं।
हाइफा की लड़ाई और भारतीय सैनिकों का योगदान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मेजर दलपत सिंह ने बेहद असाधारण और अदम्य साहस दिखाते हुए ऐतिहासिक घुड़सवार सेना का नेतृत्व किया था। उनके इसी नेतृत्व और रणनीति के कारण प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा को मुक्त कराना संभव हो पाया था। इस अभियान के दौरान उन्होंने देश के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसके बाद से उन्हें Hero of Haifa यानी हाइफा का हीरो कहा जाता है। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में हाइफा की डिप्टी मेयर Sarit Golan-Steinberg ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय सैनिकों के इस महान बलिदान के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
भारतीय दूतावास ने हाइफा नगरपालिका, हाइफा हिस्टोरिकल सोसाइटी और इस紀念 समारोह को आयोजित करने में मदद करने वाले सभी स्थानीय लोगों का दिल से आभार जताया है। दूतावास की तरफ से यह भी बताया गया कि भारतीय सैनिकों की यह ऐतिहासिक विरासत हमेशा से कर्तव्य, साहस और सम्मान का एक बड़ा प्रतीक रही है। यह शहादत भारत और इजराइल के बीच के पुराने और मजबूत दोस्ती के रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाती है। इस लड़ाई में ब्रिटिश सेना की तरफ से मुख्य रूप से भारतीय सैनिकों ने ओटोमन साम्राज्य और उसके साथियों की सेना के खिलाफ मुकाबला किया था।
तीन भारतीय रेजिमेंट और हाइफा दिवस का महत्व
हर साल 23 September के दिन को Haifa Day के रूप में मनाया जाता है ताकि उन तीनों प्रमुख भारतीय कैवलरी रेजिमेंटों को सम्मान दिया जा सके जिन्होंने हाइफा शहर को मुक्त कराने के लिए लड़ाई लड़ी थी। इन रेजिमेंटों में मैसूर, हैदराबाद और जोधपुर लांसर्स शामिल थे जो 15th Imperial Service Cavalry Brigade का हिस्सा हुआ करते थे। इन वीर सैनिकों की याद में भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित तीन मूर्ति चौक का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर Teen Murti Haifa Chowk कर दिया गया था। साल 2018 की 14 January को प्रधानमंत्री Narendra Modi और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक विशेष समारोह में इस चौक के नामकरण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
इस चौक पर बने तीन कांस्य यानी ब्रॉन्ज के स्टेचू हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लांसर्स का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा पिछले साल नवंबर के महीने में इजराइल के विदेश मंत्री Gideon Sa'ar ने भी अपनी भारत यात्रा के दौरान तीन मूर्ति हाइफा चौक पर जाकर इन अमर जवानों को अपनी श्रद्धांजलि दी थी। इस तरह से भारत और इजराइल दोनों ही देश मिलकर उन भारतीय सैनिकों के इतिहास को संजोकर रख रहे हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि से दूर जाकर अपनी बहादुरी की ऐसी मिसाल पेश की थी जिसे आज भी पूरी दुनिया याद करती है।