गाजा सिटी में इसराइली सेना का जबरन हटाने का आदेश जारी, लगातार हमलों से बिगड़े हालात.

इसराइली सेना ने 9 सितंबर 2026 को गाजा सिटी में नागरिकों को जबरन हटाने का एक औपचारिक निर्देश जारी कर दिया है। मंगलवार को गाजा पट्टी में लगातार किए गए सैन्य हमलों के बाद यह नया आदेश सामने आया है, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई और तमाम लोग घायल हो गए। इस कार्रवाई के बाद से वहां के हालात बेहद खराब हो गए हैं और आम जनता डरी हुई है।
हमास और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया
हमास के प्रवक्ता हजेम कासिम ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि विस्थापित शिविरों के पास घरों को नष्ट करना फिलिस्तीनियों को उनके इलाकों से भगाने की एक सोची-समझी साजिश है। कासिम ने आरोप लगाया कि इसराइल 'बोर्ड ऑफ मौरिस' की चुप्पी और मध्यस्थों की कमजोरी का फायदा उठाकर हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। दूसरी ओर, इसराइली रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने 8 सितंबर 2026 को दिए गए अपने बयान में कहा था कि फिलिस्तीनियों को गाजा से हटाना ही एकमात्र समाधान है, जिसके लिए जमीन, समुद्र या हवा के रास्ते कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने 'डिसएंगेजमेंट 710' नाम से सात साल की एक योजना शुरू की है, जिसका मकसद गाजा के करीब दो लाख निवासियों को स्वेच्छा से बाहर भेजना है। इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी ने इन विस्थापन योजनाओं की औपचारिक रूप से निंदा की है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के डराने वाले आंकड़े
गाजा में मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से लेकर अब तक 73,658 लोगों की मौत हो चुकी है और 174,622 लोग घायल हुए हैं। इनमें से अक्टूबर 2025 में हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद से अब तक 1,340 से ज्यादा मौतें शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के अवर महासचिव टॉम फ्लेचर ने इस आगामी सर्दियों में गंभीर मानवीय संकट की चेतावनी दी है। इसके साथ ही, रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति ICRC ने भी पुष्टि की है कि संघर्ष विराम के तमाम प्रयासों के बावजूद हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है।
ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट और तबाही का मंज़र
ब्रिटिश सरकार ने हाल ही में जारी अपने आधिकारिक बयान में माना है कि गाजा में तबाही का स्तर किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 70,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें कम से कम 20,000 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा, लगभग दो मिलियन यानी बीस लाख लोग अपने घरों से बेघर हो चुके हैं और अब वे इस पूरे इलाके के सिर्फ एक-तिहाई हिस्से में सिमटने को मजबूर हैं। इस पूरी स्थिति की अधिक जानकारी के लिए आप ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक बयान को देख सकते हैं।