दक्षिणी सीरिया में इसराइल की सैन्य कार्रवाई जारी, कूटनीतिक प्रयास और अमेरिका की मध्यस्थता बेअसर

Nura Basta31 August 20263 min read39 viewsWorld
दक्षिणी सीरिया में इसराइल की सैन्य कार्रवाई जारी, कूटनीतिक प्रयास और अमेरिका की मध्यस्थता बेअसर

दक्षिणी सीरिया में इसराइल की सेना लगातार सक्रिय बनी हुई है और वहां के कई इलाकों पर कब्जा करने के साथ हवाई हमले भी किए जा रहे हैं। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद से ही इस इलाके में इसराइल का दखल बढ़ गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 तक सीरियाई राजधानी दमिश्क इसराइल के साथ सीधी बड़ी जंग लड़ने की हालत में नहीं है, इसलिए वह लगातार कूटनीतिक रास्तों और अमेरिका की मध्यस्थता से बातचीत करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जमीन पर हालात अभी भी बहुत तनावपूर्ण बने हुए हैं और आम लोगों के लिए स्थितियां मुश्किल होती जा रही हैं।

अगस्त 2026 में लगातार हमले और सैन्य गतिविधियां

अगस्त के पूरे महीने में सैन्य टकराव की घटनाएं सामने आती रहीं। 31 अगस्त 2026 को अबू अल-धुहुर एयरबेस पर इसराइली हमलों की खबरें आईं। इसराइल का आरोप था कि सीरियाई सरकार इस जगह पर तुर्की की सेना को तैनात करने की योजना बना रही थी। इससे ठीक एक दिन पहले यानी 30 अगस्त को इसराइली सेना ने बीट जिन्न के पास बात अल-वार्डा पहाड़ी पर चार तोप के गोले दागे थे। इसके अलावा 27 और 28 अगस्त को भी बीट जिन्न के बाहरी इलाकों में गोलाबारी की गई और कुनेइत्रा गवर्नरेट के टरनेजेह गांव में इसराइली सैनिक घुस गए थे, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया है।

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जॉर्डन में हुई थी उच्च स्तर की बैठक

इन सैन्य तनावों के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी चल रही हैं। गत 23 अगस्त 2026 को सीरिया के विदेश मंत्री असाद अल-शाइबानी और इसराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के डायरेक्टर रोमन गोफमैन के बीच जॉर्डन में अमेरिका की मध्यस्थता में गुप्त बैठक हुई थी। इस उच्च स्तरीय बातचीत का मकसद एक ऐसा सुरक्षा समझौता तैयार करना था जिससे इसराइली हमले रुक सकें और असद सरकार के पतन के बाद इसराइल द्वारा कब्जा किए गए इलाकों से उसकी सेना वापस लौट सके। सीरियाई पक्ष का दावा था कि कागज पर एक शुरुआती समझौता हो गया है, लेकिन विदेश मंत्री असद अल-शाइबानी ने यह भी साफ किया कि इसराइल की नीयत और उसकी शर्तों को लागू करने की इच्छाशक्ति पर अभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता है।

इसराइल का बफर जोन और माउंट हर्मन पर कब्जा

असद सरकार के हटने के बाद से इसराइल ने साल 1974 के उस समझौते को खत्म मान लिया है जिसके तहत सेनाएं पीछे हटती थीं। इसराइल ने सीरिया के बफर जोन और माउंट हर्मन के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया है। इसराइली रक्षा मंत्री इसराइल कैट्ज ने 25 अगस्त को यह बयान दिया था कि उनकी सेना तथाकथित जिहादी खतरों से निपटने के लिए बफर जोन में ही बनी रहेगी और फिलहाल वहां से हटने का कोई इरादा नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र में सीरिया का विरोध

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 27 अगस्त को हुई बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र में सीरिया के स्थायी प्रतिनिधि इब्राहिम ओलाबी ने इसराइल की इन कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इसराइल के इन कदमों से पूरे इलाके की शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। हालांकि अमेरिका ने 24 अगस्त 2026 को सीरिया को आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों की सूची यानी स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म लिस्ट से बाहर कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद दारा और कुनेइत्रा जैसे प्रांतों में जारी इसराइली सैन्य घुसपैठ सीरिया की सरकार की कोशिशों और अमेरिका की मध्यस्थता से चल रहे शांति प्रयासों की कड़ी परीक्षा ले रही है।

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