इसराइल में वेस्ट बैंक हमले पर बड़ा विवाद, पुलिस कमांडर ने सेना पर उठाए गंभीर सवाल.

इसराइल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ कब्जे वाले वेस्ट बैंक के इसराइली पुलिस जिला कमांडर Moshe Pinchi ने अपनी ही सेना यानी IDF पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने शनिवार, 29 अगस्त 2026 को कुस्रा (Qusra) गांव में फिलिस्तीनी लोगों पर हुए हिंसक हमलों के बाद इसराइली सेना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि सेना हमलावर सेटलर्स को गिरफ्तार करने में पूरी तरह नाकाम रही है।
एक रेडियो इंटरव्यू के दौरान पुलिस कमांडर ने खुलकर बात की और बताया कि सेना को प्रदर्शनकारियों को सिर्फ तितर-बितर करने के बजाय उन्हें तुरंत हिरासत में लेना चाहिए था। चूँकि यह पूरी घटना वेस्ट बैंक के एरिया बी (Area B) में हुई थी, इसलिए वहां कानून व्यवस्था बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी सेना की ही बनती है। उन्होंने सेना की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि जब वो लोग आ रहे थे, तब सैन्य चौकियां और निगरानी पोस्ट क्या कर रहे थे और उन्होंने उस भीड़ को क्यों नहीं रोका।
घटना का पूरा विवरण और गांवों में हिंसा
घटना वाले दिन दर्जनों इसराइली सेटलर जुलुद (Jalud) और कुस्रा गांव के पास पहुंच गए थे। कुस्रा के स्थानीय लोगों ने बताया कि सेटलर्स ने एक फिलिस्तीनी परिवार के घर पर कब्जा कर लिया था और बाहर मौजूद लोगों पर लगातार पत्थरबाजी कर रहे थे। घर के मालिक Luay Bayruti ने आरोप लगाया कि जब इसराइली सैनिक वहां पहुंचे, तो उन्होंने घर के अंदर फंसे लोगों को हथकड़ी लगा दी, उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी और बुरी तरह पीटा। इसके अलावा, जुलुद गांव में एक मीडिया कवरेज कर रहे NBC न्यूज क्रू पर भी नकाबपोश सेटलर्स ने हमला कर दिया, जिसके बाद फॉरेन प्रेस एसोसिएशन यानी FPA ने इस मामले की तुरंत निष्पक्ष जांच कराने की कड़ी मांग की है।
प्रशासन और सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया
घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी और बॉर्डर पुलिस के मौके पर मौजूद होने के बावजूद, हमलावरों के वीडियो फुटेज सामने आने के बाद भी 30 अगस्त 2026 तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। इस मामले में सफाई देते हुए एक आईडीएफ (IDF) सूत्र ने बताया कि नागरिकों को नुकसान से बचाना उनकी पहली प्राथमिकता थी और बलवाइयों को हटाने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, सेना ने यह भी माना कि कुस्रा से निकलने के बाद सेटलर्स की गाड़ियां आसानी से सैन्य नाकाबंदी को पार करके जुलुद पहुंच गई थीं।
इस पूरी हिंसा पर देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने गहरी नाराजगी जताई है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस घटना को कुछ हुड़दंगियों द्वारा किए गए आपराधिक कृत्य करार दिया और कहा कि इससे सेना के काम में रुकावट आई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने पुष्टि की कि सुरक्षा बलों ने तीन गाड़ियों को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा, राष्ट्रपति Isaac Herzog ने भी इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए इसे इसराइल के चेहरे पर एक बड़ा कलंक बताया। इसराइली विदेश मंत्रालय ने भी इस हमले को पूरी तरह से एक शर्मनाक घटना बताया है। वर्तमान में इसराइल पुलिस शिन बेट (Shin Bet) के साथ मिलकर इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।