Israel Politics: इसराइल की राजनीति में घमासान, वैश्विक प्रतिबंधों और कूटनीतिक तनाव के बीच चुनाव की तारीख तय

Nura Basta9 September 20262 min read50 viewsWorld
Israel Politics: इसराइल की राजनीति में घमासान, वैश्विक प्रतिबंधों और कूटनीतिक तनाव के बीच चुनाव की तारीख तय

इसराइल की राजनीतिक स्थिति इन दिनों पूरी तरह से बदल चुकी है और पारंपरिक आर्थिक नीतियों के बजाय यह वैचारिक विवादों से घिर गई है। फिलिस्तीनी राष्ट्र को मान्यता देने, क्षेत्रों पर कब्जे और यहूदी संप्रभुता के मुद्दों पर देश के भीतर और बाहर भारी विरोध देखने को मिल रहा है। आगामी 27 अक्टूबर 2026 को इसराइल में चुनाव होने वाले हैं, जिसके मद्देनजर वामपंथी डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलन सरकार विरोधी प्रदर्शनों का लगातार नेतृत्व कर रहे हैं। मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए ऐसा लगता है कि अधिकांश इसराइली मतदाता अब भी दक्षिणपंथी विचारों के पक्ष में हैं, जो फिलिस्तीनी संप्रभुता को लेकर गहरी शंका रखते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा कूटनीतिक दबाव

इसराइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। बीते 9 सितंबर 2026 को 12 देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया था। इन देशों में कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। इन सभी ने चेतावनी दी कि वेस्ट बैंक में इसराइली कार्रवाइयां टू-स्टेट सॉल्यूशन की संभावना को खत्म कर रही हैं। इन देशों ने उन सामानों पर व्यापार प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया जो इसराइली बस्तियों से आते हैं और जिन्हें वे अवैध मानते हैं। इसके ठीक एक दिन पहले 8 सितंबर 2026 को ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने यहूदी बस्तियों से आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी और इसराइली बस्तियों पर जातीय सफाए का आरोप लगाया था। इस मामले की अधिक जानकारी के लिए ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक बयान को देखा जा सकता है। इसके जवाब में इसराइल ने 9 सितंबर को कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में ब्रिटिश कंसुलेट को बंद करने का ऐलान कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र में तीखी बहस और जमीनी हालात

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी राष्ट्र के विरोध का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता आतंकवाद को बढ़ावा देती है, जिसके बाद कई अरब और मुस्लिम बहुल देशों के प्रतिनिधि सभा से वॉकआउट कर गए। वहीं दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर इसराइली सुरक्षा बलों ने जेनिन, तुलकरम, कलकिलिया, ना Nablus और रामल्लाह में सैन्य छापे मारे। इसके अलावा जलूद और अल-मुघय्यर के पास 'राज्य भूमि' की घोषणाओं का दायरा भी बढ़ाया गया। गाजा में मानवीय संकट बेहद गंभीर बना हुआ है, जहां स्थानीय अधिकारियों के अनुसार 95% आबादी मदद पर निर्भर है और इसराइल ने सहमति से मिलने वाली मानवीय सहायता का 65% हिस्सा रोक दिया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अंदरूनी मोर्चे पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ऐसी खबरें सामने आई हैं कि यूएई के राष्ट्रपति ने 7 अक्टूबर 2023 के हमलों से पहले एक बड़े हमास अभियान के बारे में चेतावनी दी थी, जिससे इसराइल के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच दूरियां और बढ़ गई हैं।

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