इसराइल में सियासी भूचाल, सारा नेतन्याहू के बयान पर मचा बवाल और य एयर गोलान ने दी मानहानि की धमकी

Nura Basta2 September 20263 min read34 viewsWorld
इसराइल में सियासी भूचाल, सारा नेतन्याहू के बयान पर मचा बवाल और य एयर गोलान ने दी मानहानि की धमकी

इसराइल की राजनीति में इन दिनों बड़ा घमासान मचा हुआ है और देश के भीतर ही तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की पत्नी Sara Netanyahu ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ऐसा बयान दिया जिससे चारों तरफ हलचल मच गई। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच देश की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसका असर आम जनता और क्षेत्र के हालातों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।

चैनल 14 पर दिए गए इंटरव्यू से बढ़ा विवाद

यह पूरा राजनीतिक विवाद 1 सितंबर 2026 को तब शुरू हुआ जब Sara Netanyahu ने इसराइल के Channel 14 पर एक इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू के दौरान उन्होंने विपक्ष के नेता Yair Golan पर बहुत गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमलों की जानकारी विपक्ष के नेता को पहले से ही थी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जब सरकारी अधिकारियों को इस बारे में कुछ नहीं पता था, तब सुबह-सुबह Yair Golan पहले से ही कपड़े पहनकर तैयार बैठे थे।

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विपक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया और कानूनी नोटिस

सारा नेतन्याहू के इस बयान के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया। विपक्ष के नेता और डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख Yair Golan और उनकी पार्टी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से झूठा और घटिया करार दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बयान सिर्फ उनकी छवि खराब करने के लिए दिया गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि Yair Golan ने Sara Netanyahu को कानूनी नोटिस भेज दिया है। उन्होंने मांग की है कि अगर सारा नेतन्याहू ने अगले 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी और नोवा म्यूजिक फेस्टिवल के पीड़ितों को मुआवजा राशि के तौर पर 2.5 मिलियन शेकेल यानी करीब 830,000 अमेरिकी डॉलर दान नहीं किए, तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।

खुफिया एजेंसियों और प्रधानमंत्री के बयानों पर बहस

इस बीच देश के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी 1 सितंबर को एक बयान दिया जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा अधिकारियों ने जानबूझकर उन्हें हमले की शुरुआत पर नहीं जगाया। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि वह इस घटना को देश की एक बड़ी और दुखद विफलता मानते हैं, न कि देशद्रोह। दूसरी तरफ, आईडीएफ के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ Gadi Eisenkot ने 2 सितंबर को सरकार के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय को हमले से लगभग तीन घंटे पहले ही गाजा में हो रही असामान्य गतिविधियों की खुफिया जानकारी मिल चुकी थी। इस बारे में आधिकारिक बयान सरकार की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। इतिहास के दस्तावेजों जैसे कि जेरिको वॉल रिपोर्ट से भी संकेत मिलते हैं कि खुफिया विभागों के पास पहले से ही इन हमलों की योजना की जानकारी थी, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया था।

वेस्ट बैंक में जारी हिंसा और जमीनी हालात

एक तरफ जहां देश की राजधानी में राजनीतिक बयानबाजी चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर हिंसा का दौर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली सेना ने 2 सितंबर 2026 को نابلس (Nablus) शहर में एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान कम से कम 80 लोग घायल हो गए और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, पुराने शहर में रहने वाले फिलिस्तीनी परिवारों को अपने घरों को खाली करने का सख्त आदेश दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक वेस्ट बैंक में कब्जा करने वाली सेना और स्थानीय लोगों की हिंसा के कारण कुल 982 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि वेस्ट बैंक के अंदर मस्जिदों पर हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है और वहां नमाज पढ़ने आने वाले लोगों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

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