Lebanon में इसराइली सेना का बड़ा हमला, दोहा कफ़र रुम्मान में दागे गए कई तोप के गोले

लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। लेबनान की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 अगस्त 2026 की सुबह इसराइली सेना ने दोहा कफ़र रुम्मान शहर पर जोरदार तोप से गोले दागे। यह घटना पिछले 48 घंटों के दौरान क्षेत्र में हुई सैन्य कार्रवाइयों के बाद सामने आई है, जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी डर का माहौल है और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं।
पिछले दो दिनों से लगातार जारी हैं हमले
इससे पहले 29 अगस्त 2026 को भी इसराइली तोपखाने ने नबातियेह जिले के इसी इलाके को निशाना बनाया था। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार, कफ़र रेम्मान के दोहा इलाके में एक अलग इसराइली ड्रोन हमले में एक व्यक्ति घायल हो गया था। इसके अलावा, हद्दाथा और हारिस शहरों के बीच भी तोप से भारी गोलाबारी की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
समझौते को लेकर बढ़ा विवाद
ये सैन्य गतिविधियां ऐसे समय में हो रही हैं जब क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर है और जून 2026 में हुए अमेरिका समर्थित एक फ्रेमवर्क समझौते को लगातार खारिज किया जा रहा है। इस समझौते में इसराइली सेना की क्रमिक वापसी और स्थानीय सशस्त्र समूहों को हथियार छोड़ने की बात कही गई थी। लेबनान के हिजबुल्लाह संगठन के नेता नईम कासिम ने 29 अगस्त को एक टेलीविज़न संबोधन के दौरान इस समझौते को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने इसे अपमानजनक और लेबनानी संप्रभुता के लिए खतरा बताया। कासिम ने दो टूक कहा कि हिजबुल्लाह कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा और मौजूदा स्थिति को आपसी युद्ध की बजाय साफ तौर पर इसराइली आक्रामकता करार दिया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि हिजबुल्लाह ने लेबनानी सरकार के उस आग्रह को भी ठुकरा दिया है जिसमें अली ताहिर रिज से अपने लड़ाकों को हटाने की मांग की गई थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े
जून समझौते के बावजूद इसराइली सेना लगातार इस क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए है। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, 2 मार्च से 28 अगस्त 2026 के बीच इस पूरे संघर्ष में मरने वालों की कुल संख्या 4,352 तक पहुंच चुकी है, जबकि इस दौरान 12,318 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लगातार हो रहे इन हमलों से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों का जीना मुहाल हो गया है।