इजराइली रक्षामंत्री का बड़ा बयान, गाजा को पूरी तरह खाली कराना ही समस्या का एकमात्र हल

Praggya Singh sabal3 September 20262 min read32 viewsWorld
इजराइली रक्षामंत्री का बड़ा बयान, गाजा को पूरी तरह खाली कराना ही समस्या का एकमात्र हल

इजराइल के रक्षामंत्री इजराइल काट्ज ने गाजा के हालात को लेकर एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस इलाके से फिलिस्तीनियों को पूरी तरह हटाए बिना गाजा की समस्या का कोई असली समाधान नहीं निकल सकता है। तेल अवीव से सामने आई इस खबर के मुताबिक इजराइल अभी भी इसी मोर्चे पर लगातार काम कर रहा है और इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अंदरखाने पूरी तैयारी चल रही है।

डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय योजना

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल काट्ज ने बुधवार को इजराइल की एक प्रमुख न्यूज वेबसाइट वाई नेट के विचारोत्तेजक सम्मेलन में इस मुद्दे पर खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि अमेरिका के पूर्व और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल की शुरुआत में इस विचार का समर्थन किया था। काट्ज का यह भी कहना था कि ट्रंप ने एक बार यहां तक कहा था कि एक बार फिलिस्तीनियों को वहां से हटा दिए जाने के बाद अमेरिका इस इलाके पर कब्जा कर लेगा और उस पूरी जमीन का आधिकारिक मालिक बन जाएगा। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ता इस तरह की योजनाओं को एथनिक क्लींजिंग यानी किसी खास नस्ल या समुदाय के लोगों को जबरन हटाने या खत्म करने की गंभीर कार्रवाई मानते हैं।

मिस्र का रुख और अमेरिकी समर्थन

काट्ज ने आगे खुलकर बात करते हुए कहा कि इजराइल गाजा पर हर मुमकिन तरीके से कब्जा करने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठा है, लेकिन इसमें एक बड़ी रुकावट यह आ रही है कि मिस्र फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अपने देश में शरण देने से साफ इनकार कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी देश विस्थापित होने वाले फिलिस्तीनियों को स्वीकार करने के लिए तैयार होंगे, उन्हें सीधे तौर पर अमेरिकी समर्थन की सख्त जरूरत पड़ेगी। काट्ज के मुताबिक वाशिंगटन ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है, बल्कि इसे अभी के लिए केवल स्थगित किया गया है। उन्होंने यह भी साझा किया कि इस मसले पर उनकी लगातार बातचीत चल रही है और उनका मानना है कि ऐसा कदम सभी पक्षों के लिए बेहतर साबित होगा। इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए अमेरिका की मदद की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी क्योंकि पिछले तीन सालों में अमेरिका ने इजराइल को लगभग 25 अरब डॉलर की भारी-भरकम सैन्य सहायता पहुंचाई है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजराइल का खुलकर बचाव किया है, जिसमें इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है।

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