दक्षिणी लेबनान पर इजरायली ड्रोन हमलों से बढ़ी टेंशन, एक व्यक्ति घायल और कई घरों में लगी आग

मध्य पूर्व में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है और हाल ही में सामने आई घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। 29 अगस्त 2026 को दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों को इजरायली ड्रोन हमलों ने अपना निशाना बनाया। इस सैन्य कार्रवाई से वहां रह रहे आम लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं और पूरे क्षेत्र में डर का माहौल बना हुआ है। मार्च 2026 से चल रहे इस संघर्ष में पहले ही भारी नुकसान हो चुका है और ताजा हमलों ने हालात को और ज्यादा बिगाड़ दिया है।
लेबनान की सरकारी एजेंसी ने दी हमलों की जानकारी
लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कफर रेम्मान के दोहा इलाके में हुए एक ड्रोन हमले में एक व्यक्ति घायल हो गया है। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट्स में नबातिएह अल-फावका शहर में भी एक अन्य हमले की पुष्टि की गई है। इन हवाई हमलों के अलावा, इजरायली सेना ने ऐता अल-जबाल के बाहरी इलाकों में दो धमाके किए और बेइत याहून में कई घरों को आग के हवाले कर दिया। हालांकि, नबातिएह अल-फावका में हुए हमले पर इजरायली रक्षा बलों की तरफ से तत्काल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय समझौते
लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 से अब तक इजरायली सैन्य अभियानों में कुल 4,352 लोगों की मौत हो चुकी है और 12,318 लोग घायल हुए हैं। ये घटनाएं जून 2026 में साइन किए गए उस अमेरिका समर्थित फ्रेमवर्क समझौते के बावजूद हो रही हैं, जिसमें लेबनामी सेना की तैनाती और स्थानीय सशस्त्र समूहों के हथियारों को छोड़ने के बदले में क्रमिक इजरायली वापसी की बात कही गई थी। संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल ने 27 अगस्त 2026 को यह साफ किया था कि दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का पूरी तरह से पालन करें।
राजनीतिक बयानबाजी और नेताओं की प्रतिक्रिया
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और राष्ट्रपति जोसेफ आउन सहित देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने इन लगातार हो रहे हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और मौजूदा समझौते का खुला उल्लंघन बताया है। दूसरी तरफ, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हिजबुल्लाह को पूरी तरह से विसशस्त्र नहीं किया जाता, तब तक इजरायली सेना वहां से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने दक्षिण में हिजबुल्लाह की मौजूदगी को खत्म करने के पायलट कार्यक्रमों के नाकाम होने का हवाला दिया है। हिजबुल्लाह ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका पर इजरायल का साथ देने का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि वे इन सैन्य कार्रवाइयों का मुंहतोड़ और उचित जवाब देंगे।