West Bank में इसराइली सेना के बड़े छापे और गिरफ्तारियां, यहूदी छुट्टियों से पहले तनाव बढ़ा

इसराइली सेना ने हाल ही में कब्जाए गए West Bank और पूर्वी यरुशलम में बड़े पैमाने पर सैन्य छापे मारे हैं। इस कार्रवाई के दौरान कई फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया है और आम नागरिक घायल हुए हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यहूदी छुट्टियां शुरू होने वाली हैं और क्षेत्र में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। समाचार एजेंसी वाफा और अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, 13 सितंबर 2026 तक हालिया अभियानों में आठ फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया था। आम जनता के बीच इस बात की चिंता है कि इस तरह की कार्यवाहियों से माहौल और ज्यादा खराब हो सकता है।
पूर्वी यरुशलम और सिलवान इलाके में हिंसक झड़पें
13 सितंबर को इसराइली बलों ने कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम के सिलवान इलाके में एक फिलिस्तीनी व्यक्ति को गोली मारकर घायल कर दिया। पीड़ित को मध्यम श्रेणी की चोटें आईं और यह घटना उस समय हुई जब यहूदी छुट्टियों की शुरुआत हो रही थी। यरुशलम गवर्नरेट ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि इस दौरान इसराइली समूहों द्वारा अल-अक्सा मस्जिद परिसर के अंदर धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए लगातार भड़काऊ कॉल किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ रहा है।
कई गवर्नरेट में ताबड़तोड़ छापे और गिरफ्तारियां
ये सैन्य अभियान उन सघन छापों के तुरंत बाद शुरू हुए जो 12 सितंबर को जेनिन, نابلس (Nablus), रामल्ला (Ramallah), हेब्रोन (Hebron), टुबास (Tubas) और तुलकर्म (Tulkarm) जैसे कई गवर्नरेट में डाले गए थे। इन रात्रिकालीन हमलों के दौरान, हेब्रोन के अल-अर्रूब शरणार्थी शिविर से छह लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि अल-बिराह के अल-अमारी शरणार्थी शिविर में एक अन्य युवक को हिरासत में लिया गया। जेनिन गवर्नरेट में छह लोगों को पकड़ा गया और मारका गांव में एक 14 साल के लड़के का हाथ टूट गया।
जेनिन क्षेत्र से जिन विशिष्ट व्यक्तियों को उठाया गया उनमें नबील सलाह, हारिस मसाद्, बशीर मसाद्, बिलाल जुहदी मोहम्मद ओमरिया, मोहम्मद खालिद यासिन और फादी अल-हिंदी शामिल हैं। इसके अलावा, इसराइली बलों ने जेनिन में पत्रकार अली अल-सामूदी के घर पर भी छापा मारा। सैनिकों ने उनके बेटे के साथ मारपीट की और पत्रकार के आत्मसमर्पण करने का अल्टीमेटम भी जारी किया। इस तरह की कार्रवाइयों से मीडियाकर्मियों और स्थानीय परिवारों में भारी डर का माहौल है।
बस्ती बसाने वालों (Settlers) के हमले और सैन्य कानून
इन छापों के साथ-साथ इसराइली बस्तियों के लोगों ने फिलिस्तीनियों पर कई हमले किए। फक्कूआ गांव में सेटलर्स ने किसानों पर गोलियां चलाईं, जिससे कम से कम दो लोग घायल हो गए, जबकि एक अन्य गोलीबारी की घटना में एक फिलिस्तीनी के पैर में गोली लग गई। बुरका गांव में भी हिंसा की खबर आई जहां हमलावरों ने पत्थरों से घरों और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया, और यासुफ गांव में भी घरों को निशाना बनाया गया। भारी इसराइली सैन्य सुरक्षा के बीच हजारों सेटलर्स यरुशलम के पुराने शहर में दाखिल हुए।
इसराइली सेना ने पुष्टि की कि 11 सितंबर को शुरू हुआ एक अचानक सैन्य अभ्यास का उद्देश्य छुट्टियों की अवधि के दौरान विभिन्न परिदृश्यों के लिए अपनी ऑपरेशनल तैयारी का परीक्षण करना था। वर्तमान इसराइली सैन्य कानून के तहत, सेना के कमांडरों के पास West Bank के लगभग 30 लाख फिलिस्तीनी निवासियों पर कुल कार्यकारी, विधायी और न्यायिक अधिकार हैं, जिससे स्थानीय आबादी के पास कानूनी अधिकारों का दायरा बेहद सीमित रह जाता है।