West Bank में इस्राइली सेना की छापेमारी, एक फलस्तीनी नागरिक की मौत और शव पर विवाद

इस्राइली सेना ने पश्चिम बैंक (West Bank) के نابلس (Nablus) के पास स्थित अकराबा (Aqraba) शहर में एक सैन्य अभियान के दौरान एक फलस्तीनी व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है और सेना ने मृतक के शव को भी अपने पास ही रोक रखा है। इस सैन्य कार्रवाई ने स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है, क्योंकि इस तरह की कार्रवाइयों से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोगों में डर का माहौल बनता जा रहा है।
सेना की कार्रवाई और स्थानीय लोगों का विरोध
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्राइली सैनिकों ने देइरिया इलाके में एक घर को पूरी तरह से घेर लिया था। इस दौरान सैनिकों ने एंटी-टैंक राइफल ग्रेनेड और बुलडोजर का इस्तेमाल करके उस इमारत के कई हिस्सों को गिरा दिया। आसपास के लोगों ने बताया कि इलाके में कई घंटों तक लगातार गोलीबारी की आवाजें गूंजती रहीं और दो बड़े धमाके भी सुने गए। फलस्तीनी रेड क्रेसेंट सोसायटी ने जानकारी दी कि उनके मेडिकल स्टाफ को इस घेराबंदी के दौरान घायल व्यक्ति तक पहुंचने से रोक दिया गया, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल सका।
अलग-अलग दावे और प्रशासनिक बयान
अकराबा के मेयर सलाह अबू शहादा (Salah Abu Shahada) ने इस्राइली सेना के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि मृतक व्यक्ति पूरी तरह से निहत्था था और दोनों पक्षों के बीच किसी भी तरह की गोलीबारी नहीं हुई थी। मेयर ने इस पूरे ऑपरेशन को ताकत का बेहद गलत और अत्यधिक इस्तेमाल बताया। दूसरी ओर, इस्राइली सेना के प्रवक्ता ने दावा किया कि वह व्यक्ति एक हथियारबंद शख्स था जो सैनिकों पर हमला करने की कोशिश कर रहा था। सेना का यह भी कहना था कि सैनिक उससे पूछताछ करने के लिए घर के अंदर गए थे, क्योंकि उस पर सशस्त्र समूहों से जुड़े होने का शक था। सेना के अनुसार, उस व्यक्ति ने सैनिकों पर मोलोटव कॉकटेल और एक देशी विस्फोटक फेंका था और इसके बाद चाकू लहराया था। इसके अलावा, सेना ने अकराबा से चार अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें से तीन पर हथियारों की तस्करी और एक पर हमले की योजना बनाने का आरोप लगाया गया है।
शव रोकने की पुरानी नीति और मानवाधिकारों के सवाल
यह घटना ठीक एक दिन बाद सामने आई जब 7 सितंबर 2026 को कबालन में 34 वर्षीय महमूद मोहम्मद अरबी मोहसेन (Mahmoud Mohammad Arabi Mohsen) की भी इस्राइली बलों के हाथों मौत हो गई थी और उनका शव भी अभी तक परिवार को नहीं सौंपा गया है। मारे गए व्यक्ति की पहचान को लेकर भी थोड़ी असमंजस रही, जहां फलस्तीनी समाचार एजेंसी वफा ने मृतक का नाम 29 वर्षीय अब्दुल करीम मुहम्मद सलेम खादेर (Abdul Karim Muhammad Salem Khader) बताया, वहीं फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीड़ित का नाम 28 वर्षीय अब्दुलकरीम सुलेमान (Abdulkarim Suleiman) दर्ज किया। फलस्तीनियों के शवों को रोककर रखने की यह नीति बेहद विवादित है और मानवाधिकार संगठन इसे सामूहिक सजा करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा करते हैं। शहीदों के शवों की वापसी के लिए काम करने वाले राष्ट्रीय अभियान के आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त 2026 तक इस्रायल पर 1,700 से अधिक फलस्तीनियों के शवों को अपने कब्जे में रखने का अनुमान है। इस तरह के शवों को रोकने की अनुमति इस्रायली आतंकवाद विरोधी कानून में साल 2018 में किए गए एक संशोधन के तहत दी गई है।