वेस्ट बैंक के कुस्रा गांव में इसराइली सेना ने लगाए नए बैरिकेड्स, फलस्तीनी परिवारों की बढ़ाई मुश्किलें.

Nura Basta28 August 20263 min read24 viewsWorld
वेस्ट बैंक के कुस्रा गांव में इसराइली सेना ने लगाए नए बैरिकेड्स, फलस्तीनी परिवारों की बढ़ाई मुश्किलें.

वेस्ट बैंक के कुस्रा गांव में इसराइली सेना ने फलस्तीनी परिवारों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दी हैं। 28 अगस्त 2026 को इसराइली बलों ने गांव की रास अल-ऐन पहाड़ी पर बने तीन फलस्तीनी घरों के पास तीन नए बैरिकेड्स लगा दिए हैं। इन बैरिकेड्स पर कंक्रीट के ब्लॉक के ऊपर पीले और नारंगी रंग के मेटल गेट लगाए गए हैं। इन सभी नए रास्तों और बाधाओं पर पूरी तरह से इसराइली सेना का नियंत्रण है, जिससे स्थानीय परिवारों का आना-जाना बेहद मुश्किल हो गया है। ये परिवार 9 अगस्त 2026 से इसराइली सेटलर्स यानी यहूदी बस्तियों के लोगों की घेराबंदी का सामना कर रहे हैं।

प्रवासी और स्थानीय लोगों का जीवन हुआ प्रभावित

इस घेराबंदी से प्रभावित होने वाले लोगों में फलस्तीनी-अमेरिकी नागरिक लुई रिडी भी शामिल हैं, जो अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए वापस लौटे थे। वे 17 अगस्त के बाद से अपने घर से खुलकर बाहर नहीं जा पा रहे हैं। एक अन्य स्थानीय निवासी अब्दुल हकीम वादी ने बताया कि एक नए गेट ने उनकी एक हेक्टेयर जमीन के रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इस जमीन पर उनके 100 से ज्यादा जैतून के पेड़ और एक पानी का कुआं है, जिस पर उनका कहना है कि सेटलर्स ने कब्जा कर लिया है। इसराइली सेना ने इस पूरे इलाके को 'बंद सैन्य क्षेत्र' घोषित कर दिया है। राहत सामग्री के तौर पर खाने-पीने का सामान कभी-कभार ही मिल पा रहा है, लेकिन लोग अपने घरों में ही कैद रहने को मजबूर हैं।

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मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता

इसराइली मानवाधिकार संगठन येश दिन की कार्यकारी निदेशक सिव स्टाल ने सेना के इस रवैया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सेना सेटलर्स की हरकतों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय चूहे-बिल्ली का खेल खेल रही है और इस घेराबंदी को खत्म करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी साफ नजर आती है। इससे पहले अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने सेटलर्स के इस आचरण की कड़ी निंदा की थी और इस घेराबंदी को एक डरावनी आतंकी घटना करार दिया था। अमेरिकी अधिकारियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा करने का दबाव भी बनाया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजार्रिक ने पुष्टि की कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस जगह का दौरा किया है। वहीं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने बताया है कि यह घटना नवंबर 2025 में एक आउटपोस्ट की स्थापना के बाद से लगातार बढ़ रही हिंसा का ही एक हिस्सा है।

कानून और प्रशासनिक बदलावों पर सवाल

रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने हाल ही में आदेश दिया है कि सेटलर्स से जुड़े कानून और व्यवस्था के मामलों की जिम्मेदारी सेना से हटाकर इसराइली पुलिस को सौंपी जाए। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र के अधिग्रहण की ओर एक और इशारा है। हालांकि इसराइली रक्षा बल यानी आईडीएफ का कहना है कि ये तैनातियां सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध ढांचों को हटाने के लिए की जा रही हैं। इसके बावजूद, हाल ही में सैनिकों द्वारा एक परिवार के कपड़े खिड़की से बाहर फेंकने जैसी घटनाओं की काफी आलोचना हुई है। अमेरिकी दूतावास की ओर से समाधान निकालने के वादों के बावजूद 28 अगस्त तक स्थिति जस की तस बनी हुई है और रिडी तथा वादी जैसे परिवार इन कड़ी पाबंदियों के बीच जीने को मजबूर हैं।

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