लेबनान में इसराइली सेना का जोरदार हमला, संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा हालात बिगड़ने पर जताई चिंता.

3 सितंबर 2026 को इसराइली सेना ने लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में ताबड़तोड़ हमले किए, जिससे पूरे इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सैन्य कार्रवाई में लड़ाकू विमान, तोपखाने, मर्कवा टैंक, डी9 बुलडोजर और ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इस हमले की वजह से आम लोगों की मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ गईं और आम बस्तियों में डर का माहौल बन गया।
इन इलाकों को बनाया गया निशाना
इसराइली सेना ने वादी अल-सलौकी, मंसूरी शहर, जवतार के पूर्वी इलाकों, नबातिये अल-फुफाह और हासबया जिले के हलता फार्म जैसे कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया। मंसूरी और मजदौन के बीच अल-मुशा क्षेत्र में घरों और बुनियादी ढांचे को विस्फोटकों की मदद से पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। वहीं, हलता फार्म इलाके में रहने वाले स्थानीय लोगों को आगे बढ़ रही इसराइली सेना ने चारों तरफ से घेर लिया था, जिससे वहां फंसे नागरिकों की जान पर संकट मंडराने लगा।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई गंभीर चिंता
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने हाल ही में जानकारी दी कि संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों ने ब्लू लाइन के पास सुरक्षा हालात में भारी गिरावट दर्ज की है। शांति सैनिकों ने बताया कि सीमा के उत्तरी हिस्से में इसराइली सेना की मौजूदगी सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का खुला उल्लंघन है। इसके अलावा, पश्चिमी दमिश्क में बित अल-वार्दा पहाड़ी के पास इसराइली तोपखाने द्वारा चार गोले दागे जाने की भी खबर सामने आई, हालांकि इस घटना में किसी के भी घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कैदियों की रिहाई पर हुआ समझौता
इन तमाम सैन्य संघर्षों और तनाव के बीच, इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने पांच लेबनानी नागरिकों को रिहा करने के समझौते की पुष्टि की। इन लोगों को आतंकवादी संगठनों से जुड़ा हुआ नहीं पाया गया था। लेबनान द्वारा 1980 के दशक में अगवा किए गए लेबनानी यहूदी नेताओं के अवशेषों का पता लगाने में मदद करने के बाद यह कदम उठाया गया। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाज सलाम ने इस कैदी रिहाई प्रक्रिया में अमेरिकी मध्यस्थता की बात स्वीकार की। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने इस रिहाई को लेबनान और इसराइल के बीच बातचीत के नए रास्ते खोलने की एक सीधी पहल बताया। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी आप इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक बयान में देख सकते हैं।