लेबनान में इसराइल के भीषण हमले जारी, हवाई हमलों और गोलाबारी से सहमे लोग, हजारों ने छोड़ा घर.

दक्षिण लेबनान में इसराइली सेना की सैन्य गतिविधियां 9 सितंबर 2026 को बहुत ज्यादा तेज हो गईं। युद्धक विमानों, तोपखाने और ड्रोनों ने नबातियेह अल-फवका, मंसूरी और वादी अल-सलूकी क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी और अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में मंसूरी में ड्रोन से विस्फोटक कनस्तर गिराए गए और टायर के वादी जिबकिन में हवाई हमले किए गए। इसके अलावा शक्र की तरफ से वादी सलूकी को निशाना बनाया गया, दोहा कफर रोउमाने के पास तोप से गोले दागे गए, मज्दाल ज़ौन की तरफ भारी मशीन गन से फायरिंग की गई और खियाम के पूर्वी हिस्से में टैंकों की हलचल देखी गई।
हिंसा में आम नागरिकों की जान जाने का सिलसिला तेज
नबातियेह क्षेत्र के जेब्दिने में एक ड्रोन हमले में मोटरसाइकिल पर सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई। 4 सितंबर 2026 से शुरू हुई हिंसा के इस नए दौर में अब तक कम से कम 29 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक ही परिवार के 12 सदस्य भी शामिल हैं। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 5 से 7 सितंबर के बीच 27 लोगों की मौत हुई और 69 लोग घायल हुए। खास तौर पर 7 सितंबर को कफर रोउमाने में 12 लोग मारे गए और 10 घायल हुए, जबकि 6 सितंबर को हुए हमलों में 11 लोगों की जान गई और 26 घायल हुए। इन हमलों में नबातियेह अल-फवका का घंदौर अस्पताल भी पूरी तरह तबाह हो गया।
अंतरराष्ट्रीय चिंता और UNIFIL की रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय शांति सेना UNIFIL की रिपोर्ट के अनुसार, 3 सितंबर से 7 सितंबर के बीच इसराइल की तरफ से 528 गोले दागे गए और अकेले 6 सितंबर को 62 बार हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया गया। रणनीतिक हिजबुल्लाह ठिकाने अली अल-ताहेर रिज पर कब्जे के बाद से इसराइली सेना ने अपनी गतिविधियां काफी बढ़ा दी हैं। इस खौफनाक माहौल के चलते पिछले एक हफ्ते में नबातियेह जिले से लगभग 20,000 निवासी अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर भागने को मजबूर हो गए हैं। इस पूरी स्थिति पर अधिक जानकारी के लिए ReliefWeb Report और QNA News पर जा सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र और लेबनान के नेताओं की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनी गुटेरेस ने 8 सितंबर 2026 को नागरिकों की लगातार जाती जानों पर गहरी चिंता जताई। उनके प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने तुरंत युद्ध रोकने और इसराइली सेना को वापस बुलाने की अपील की है। साथ ही स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और मानवीय सहायता के रास्ते में आ रही रुकावटों पर भी जोर दिया गया है। दूसरी ओर, लेबनान के लगभग 400 प्रतिष्ठित लोगों ने देश में बड़े कब्जे के डर से नबातियेह में लेबनीज सेना को तैनात करने की मांग की है। नार्वेजियन शरणार्थी परिषद (NRC) की चेतावनी के बावजूद कि जून का शांति समझौता अब फेल हो रहा है, लेबनान के अधिकारी अभी भी बातचीत और कूटनीति को ही समस्या का समाधान मान रहे हैं।