West Bank में इसराइली सेना की कार्रवाई, वदी दौक के पास उखाड़े गए फलदार जैतून के पेड़.

इसराइली सेना ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में वदी दौक गांव के पास एक बार फिर से बुलडोजर का इस्तेमाल किया है। इस कार्रवाई के दौरान वहां लगे पुराने और फलदार जैतून के पेड़ों को बड़े पैमाने पर उखाड़ दिया गया है। स्थानीय लोगों और किसानों के लिए यह बहुत बड़ा झटका है क्योंकि जैतून की कटाई का सीजन अब बेहद करीब आ चुका है। इस पूरी घटना से स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए पूरी तरह से इसी खेती पर निर्भर रहते हैं।
कब्जे वाली जमीन और सैन्य आदेश
यह पूरी कार्रवाई रविवार, 6 सितंबर 2026 को हुई जब इसराइली सेना ने जेनिन के दक्षिण में स्थित वदी दौक गांव के पास पेड़ों को उखाड़ने का अभियान जारी रखा। फलस्तीनी समाचार एजेंसी Wafa की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान जेनिन-नाबुलस रोड के दोनों किनारों पर फैली कृषि भूमि को निशाना बना रहा है। यह इलाका अर्राबा गोल चक्कर से लेकर गांव के प्रवेश द्वार तक फैला हुआ है। वदी दौक ग्राम परिषद के प्रमुख अब्देल नासेर अल-हुवैती ने जानकारी दी है कि इस विनाशकारी कार्रवाई की वजह से अब तक कुल 27 डूनम जमीन प्रभावित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जिन पेड़ों को हटाया गया वे पूरी तरह से विकसित और फल देने वाले थे।
जेनिन गवर्नरट में चल रही है बड़ी कार्रवाई
पेड़ों को उखाड़ने की यह घटना जेनिन गवर्नरट में चल रहे भूमि सफाई के एक बड़े अभियान का हिस्सा है। 6 सितंबर 2026 से ठीक पहले के हफ्ते में, इसराइली बलों ने अर्राबा और याबाद शहरों को जोड़ने वाली सड़क के किनारे सैकड़ों जैतून के पेड़ों को लगातार उखाड़ दिया था। क्षेत्रीय स्तर पर चल रही यह गतिविधियां इसराइली कब्जा अधिकारियों द्वारा 6 अगस्त 2026 को जारी किए गए सैन्य आदेशों की एक सीरीज से जुड़ी हुई हैं। उन आदेशों के तहत याबाद, अर्राबा, अंजा और अज्या क्षेत्रों में कुल 310,868 डूनम भूमि से वनस्पतियों को हटाने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा मारका शहर में 3,536 डूनम जमीन पर कब्जा करने का एक अलग आदेश भी जारी किया गया था।
किसानों की आजीविका पर संकट
इन पेड़ों के नष्ट होने से फलस्तीनी किसानों की आर्थिक स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। फलस्तीनी समाज में जैतून की खेती केवल आय का मुख्य जरिया ही नहीं है, बल्कि यह उनकी सांस्कृतिक विरासत का भी एक बहुत अहम हिस्सा है। इसराइली अधिकारियों ने अतीत में इस तरह के अभियानों के पीछे सड़क सुरक्षा और यहूदी बस्तियों की आवाजाही का हवाला दिया है। हालांकि, स्थानीय निवासियों और पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस तरह की तबाही का असल मकसद स्थानीय लोगों का अपनी जमीन से रिश्ता तोड़ना और इस क्षेत्र में बस्तियों का विस्तार करना है। इस पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसान अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।