West Bank में इसराइली सेना की छापेमारी तेज, घरों पर हमले और गिरफ्तारियों से तनाव बढ़ा.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इसराइली सेना ने 31 अगस्त 2026 को कब्जाए गए वेस्ट बैंक में कई घरों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान एक स्थानीय नागरिक को गिरफ्तार भी किया गया, जिससे इलाके में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। इस ताजा कार्रवाई से पहले भी लगातार दो दिनों तक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य गतिविधियां और हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिससे आम लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
वेस्ट बैंक के कई इलाकों में सैन्य कार्रवाई
बीते 30 अगस्त 2026 को इसराइली बलों ने वेस्ट बैंक के कई महत्वपूर्ण इलाकों में व्यापक अभियान चलाया था। इस दौरान सैनिकों ने तुलकरम के दक्षिण में स्थित अल-फाराह शरणार्थी शिविर पर छापा मारा, जहां आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के कारण छह फिलिस्तीनी नागरिक घायल हो गए। इसके अलावा जेनिन शहर, तुलकरम के पास स्थित काफर अल-लाबद शहर और रामल्लाह के पश्चिम में बसे डेर कदिस गांव में भी सैन्य घुसपैठ की खबरें सामने आईं। इतना ही नहीं, सैनिकों ने अल-बिरेह में प्रवेश करने के अलावा पूर्वी यरुशलम में स्थित यूएनआरडब्ल्यूए द्वारा संचालित कलंदिया वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर पर भी एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार छापा मारा।
सेटर्स की हिंसा और आम लोगों की मुश्किलें
सैन्य छापों से ठीक पहले के दिनों में चरमपंथी इसराइली सेटर्स द्वारा बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाई गई थी। 29 और 30 अगस्त 2026 के बीच दर्जनों इसराइली सेटर्स ने उत्तरी वेस्ट बैंक के कुसरा गांव पर हमला बोल दिया और वहां रहने वाले परिवारों की मौजूदगी के बावजूद एक घर पर कब्जा कर लिया। हालांकि बाद में इसराइली सैनिकों ने हस्तक्षेप कर सेटर्स को वहां से हटाया, लेकिन इस दौरान सैनिकों ने भी मौके पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया और कुछ स्थानीय निवासियों को हिरासत में ले लिया। पास के ही जलूद गांव में नकाबपोश सेटर्स ने एक फिलिस्तीनी महिला के साथ-साथ एनबीसी न्यूज की रिपोर्टिंग टीम पर भी हमला किया। कुसरा में हुई इस हिंसा के बाद इसराइली सेना ने छह फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया, जिन्हें बाद में पूछताछ और उत्पीड़न के बाद छोड़ दिया गया।
शीर्ष नेतृत्व की तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरी हिंसा और घटनाओं के बाद इसराइल के वरिष्ठ नेतृत्व की तरफ से दुर्लभ निंदा सामने आई है। देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेटर्स की इन गतिविधियों को आपराधिक हिंसा करार दिया और कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भी कुसरा हमले की कड़ी आलोचना की, जबकि इसराइल के विदेश मंत्रालय ने इस हिंसा को एक बड़ा कलंक बताया। इसराइली सेना ने सफाई देते हुए कहा कि व्यवस्था बहाल करने के लिए बॉर्डर पुलिस और सैनिकों को कुसरा तथा जलूद भेजा गया था और उन्हें फिलिस्तीनी नागरिकों के घायल होने की रिपोर्टों की पूरी जानकारी है।