इजरायली सेना ने जेनिन कैंप पर किया कब्जा, एयरस्ट्राइक में तीन लोगों की मौत के बाद बड़ा एक्शन.

इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 28 अगस्त 2026 को एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि वेस्ट बैंक में स्थित जेनिन शरणार्थी शिविर को पूरी तरह से खाली करा लिया गया है। इस इलाके पर अब इजरायली सेना का स्थाई कब्जा हो चुका है। यह सैन्य कार्रवाई उस समय सामने आई जब इजरायली सेना ने इसी दिन एक दुर्लभ हवाई हमला किया था। इस एयरस्ट्राइक में तीन फलस्तीनी नागरिकों की जान चली गई थी, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। आम लोग इस घटना के बाद से काफी डरे हुए हैं और वहां के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
इजरायली सेना और फलस्तीनी संगठनों के दावे
इजरायली सेना ने इस हवाई हमले को आतंकवादियों के खिलाफ एक सटीक और लक्षित ऑपरेशन बताया है। सेना की तरफ से यह जानकारी दी गई कि इस हमले का मुख्य निशाना कैस बिटावी नाम का एक उग्रवादी था। इजरायली सेना का कहना है कि बिटावी हमास संगठन से जुड़ा हुआ था और वह नागरिकों तथा सुरक्षा बलों पर हमले की योजना बनाने के साथ-साथ उनके लिए फंडिंग का काम भी करता था। हालांकि, इसके उलट फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद संगठन ने यह दावा किया कि बिटावी उनके अपने सशस्त्र विंग का एक सीनियर कमांडर था। इस हमले के बाद हमास संगठन ने कड़े शब्दों में इसकी निंदा की और इसे एक नरसंहार करार दिया है।
मेडिकल टीम को रोका और अस्पतालों तक नहीं पहुंचने दिया
पैलेसटाइन रेड क्राइसिस एम्बुलेंस सेवा के मुताबिक, इस एयरस्ट्राइक के तुरंत बाद इजरायली जमीनी सैनिकों ने घटनास्थल पर एक बड़ा छापा मारा। इस दौरान राहत और बचाव कार्य में लगे मेडिकल स्टाफ को कुछ समय के लिए हिरासत में भी ले लिया गया। एम्बुलेंस सेवा ने यह भी आरोप लगाया कि सैनिकों ने डॉक्टरों और मेडिकल कर्मियों को घायलों तथा मृतकों को अस्पताल ले जाने से रोक दिया था। घायलों को समय पर इलाज न मिलने की वजह से वहां की स्थिति और ज्यादा दर्दनाक बन गई, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा और लाचारी साफ तौर पर देखी जा सकती है।
रक्षा मंत्री का कड़ा रुख और जारी रहेगा सैन्य अभियान
रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने वेस्ट बैंक की सुरक्षा को लेकर अपनी आक्रामक नीति को पूरी तरह से सही ठहराया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इजरायली सेना जेनिन में अपनी स्थाई मौजूदगी हमेशा बनाए रखेगी। उन्होंने अपने बयान में कहा कि हम आतंक का इंतजार नहीं करते बल्कि उसका पीछा करते हैं, उसके ठिकानों को नेस्तनाबूद करते हैं और उनके लोगों को रोकते हैं। इजराइल की इस रणनीति के तहत तुलकर्म और नूर शम्स जैसे अन्य इलाकों में भी लगातार अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया जा सके।
किसानों पर भी हमला और बस्तियों का विस्तार
इस पूरे सैन्य तनाव के बीच जमीन पर अन्य घटनाएं भी तेजी से घटित हो रही हैं। 28 अगस्त को ही इजरायली बस्तियों के लोगों ने जेनिन के दक्षिण में स्थित अर्रबा के पास फलस्तीनियों के एक खेत को पूरी तरह से तबाह कर दिया। इस तोड़फोड़ की वजह से वहां की बाड़, सिंचाई के उपकरण और पेड़ों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इससे पहले 27 अगस्त 2026 को भी लगातार री-ऑक्यूपेशन यानी दोबारा कब्जा करने, जमीन पर जबरन कब्जा जमाने और घरों को गिराने की खबरें सामने आई थीं। इसके अलावा वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने गैलील और नेगेव में बस्तियों का विस्तार करने की एक अलग योजना का भी खुलासा किया है, जिससे इलाके का माहौल लगातार अशांत बना हुआ है।