दक्षिणी लेबनान के हौला शहर पर इसराइली सेना का हमला तेज, 90 फीसदी घर और बुनियादी ढांचा हुआ तबाह.

Praggya Singh sabal31 August 20263 min read39 viewsEnglish
दक्षिणी लेबनान के हौला शहर पर इसराइली सेना का हमला तेज, 90 फीसदी घर और बुनियादी ढांचा हुआ तबाह.

लेबनान के दक्षिणी हिस्से में स्थित मरजायून जिले के हौला शहर पर इसराइली सेना ने 31 अगस्त 2026 को फिर से बड़े पैमाने पर हमले किए। इन सैन्य अभियानों में जोरदार धमाके और तोप से की गई भारी गोलाबारी शामिल रही, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। इस हमले से पहले भी 29 अगस्त 2026 को इस इलाके में कई बस्तियों को आग के हवाले कर दिया गया था और एक बुजुर्ग देखभाल केंद्र यानी ओल्ड एज होम को पूरी तरह से गिरा दिया गया था। इसके बाद 30 अगस्त 2026 को भी लगातार तोड़फोड़ और डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रही, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।

हौला के मेयर का बयान और भारी तबाही

हौला के मेयर ने इस पूरी स्थिति पर गहरी चिंता जताई और एक बहुत डरावनी रिपोर्ट सामने रखी। उनके मुताबिक, इसराइली हवाई हमलों, गोलाबारी और डिमोलिशन की वजह से गांव के करीब 90 प्रतिशत घर और जरूरी बुनियादी ढांचा पूरी तरह से मलबे में बदल चुका है। मेयर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह पूरा शहर अब एक आपदा प्रभावित क्षेत्र यानी डिजास्टर एरिया बनता जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर बड़ा सवाल उठाया और कहा कि इस बड़े पैमाने पर हो रही तबाही को रोकने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है। यह सारी हिंसा उस समय हो रही है जब पहले से ही एक कमजोर युद्धविराम यानी सीजफायर लागू है। कई जानकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां इस साल की शुरुआत में हुए समझौतों का खुला उल्लंघन हैं।

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सुरक्षा जोन और दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया

इस बीच, इसराइल ने लेबनान की सीमा के अंदर अपनी तरफ से एकतरफा तौर पर 10 किलोमीटर का एक सुरक्षा जोन बना रखा है। लेबनान की सरकार ने इस कदम को पूरी तरह से उनकी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और इसकी कड़ी निंदा की। हाल ही में इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने एक बयान में कहा था कि उनकी सेना ने लिटानी नदी के ऊपर बने दो पुलों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। उनका आरोप था कि हिजबुल्लाह इन पुलों का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी के लिए कर रहा था। दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह के नेता Naim Qassem ने अमेरिका समर्थित शांति समझौते के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे पूरी तरह से अवैध और अपमानजनक बताया और साफ कर दिया कि उनका संगठन किसी भी कीमत पर घुटने नहीं टेकेगा और समर्पण नहीं करेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और क्षेत्रीय तनाव

लेबनान और इसराइल के बीच चल रहे इस संघर्ष का असर आम नागरिकों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बहुत भारी पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 मार्च से लेकर जून के बीच लेबनान में स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों को निशाना बनाकर कुल 208 अलग-अलग हमले किए गए। 31 अगस्त 2026 तक, अल जजीरा इंग्लिश और इस्लाम टाइम्स जैसे स्थानीय मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स में लगातार इस बात का जिक्र किया जा रहा है कि इसराइल, हिजबुल्लाह और उनके अंतरराष्ट्रीय समर्थकों के बीच चल रही तनातनी से पूरे इलाके की सुरक्षा खतरे में पड़ी हुई है।

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