West Bank में इसराइली Settlers का आतंक, किसानों की फसल और सिंचाई नेटवर्क को किया तबाह.

वेस्ट बैंक के तुباس शहर के पूर्व में स्थित Khirbet Yerza गांव में इसराइली उपनिवेशवादियों ने एक बार फिर हिंसा और बर्बादी का तांडव दिखाया है। गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को हुई इस घटना में स्थानीय फलस्तीनी किसानों की कड़ी मेहनत से उगाई गई थyme यानी अजवायन की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा, कृषि भूमि के चारों तरफ लगी बाड़ को चुरा लिया गया और सिंचाई प्रणालियों को भी तोड़ दिया गया, जो पौधों को जिंदा रखने के लिए बेहद जरूरी थीं। इस पूरे हमले की पुष्टि येरजा गांव परिषद के प्रमुख Mukhles Masaeed ने की, जिन्होंने बताया कि इस तरह की हरकतों से आम किसानों की जिंदगी बेहद मुश्किल होती जा रही है।
वेस्ट बैंक में लगातार बढ़ रही है Settlers की हिंसा
यह अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह कब्जे वाले वेस्ट बैंक में लगातार बढ़ रही हिंसा का एक हिस्सा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र यानी UN ने साल 2026 की पहली छमाही में इस तरह की 1,300 से ज्यादा घटनाओं को दर्ज किया था। इसके अलावा, Wall and Colonization Resistance Commission के डेटा से यह पता चलता है कि अकेले जुलाई 2026 में फलस्तीनियों और उनकी संपत्ति पर कुल 2,256 हमले हुए। इनमें से 798 हमलों को सीधे तौर पर इन सेटलर्स यानी उपनिवेशवादियों ने अंजाम दिया था। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोगों का अपने ही गांवों में रहना दूभर हो गया है।
हजारों लोगों को होना पड़ा है बेघर
ब'त्सेलेम यानी B'Tselem द्वारा 30 जून 2026 तक जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इसराइली सेना और सेटलर्स की मिलीजुली हिंसा का असर बहुत भयानक रहा है। इन हमलों और जुल्मों की वजह से कुल 64 फलस्तीनी समुदायों को जबरन उजाड़ दिया गया है, जिससे 4,328 से ज्यादा लोग बेघर होने के लिए मजबूर हो गए हैं। इन परिवारों के पास अपनी खेती और रोजी-रोटी का कोई दूसरा जरिया नहीं बचा है, और वे लगातार डर के साए में जीने को मजबूर हैं। इस पूरी जानकारी को सबसे पहले फलस्तीनी समाचार एजेंसी WAFA और Al Jazeera English ने प्रमुखता से उठाया था।
राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया
इस तरह की हिंसक घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीति गरमाई हुई है। सितंबर 2026 की शुरुआत में, अमेरिका के राजदूत Mike Huckabee ने कुछ हिंसक सेटलर्स को खुलेआम 'आतंकवादी' करार दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि संपत्ति को नष्ट करना या मस्जिदों में आग लगाना किसी आम अपराधी का काम नहीं, बल्कि साफ तौर पर आतंकवाद है। दूसरी ओर, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इन हमलावरों को केवल 'कुछ हुड़दंगियों का समूह' बताया है, जबकि इसराइली विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से इन हरकतों को 'एक कलंक' माना है। इसके बावजूद जमीन पर हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं और आम किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।