Al-Aqsa Mosque के पास इसराइली Settlers की हरक़तें जारी, लगातार तीसरे हफ्ते Bab al-Rahma Cemetery में की गई प्रार्थना.

इसराइल के Settlers यानी यहूदी प्रवासियों ने अल-अक्सा मस्जिद के पास स्थित ऐतिहासिक कब्रिस्तान में लगातार तीसरे हफ्ते धार्मिक अनुष्ठान किए हैं। यह घटना शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को हुई, जब दर्जनों की संख्या में लोग बाब अल-रहमा कब्रिस्तान पहुंचे और वहां प्रार्थना की। इस दौरान शofar यानी एक पारंपरिक सींग भी बजाया गया। यह पूरा मामला इसराइली पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच अंजाम दिया गया, क्योंकि आने वाले दिनों में यहूदी नया साल रोश हशनाह आने वाला है। इससे एक दिन पहले यानी 10 सितंबर 2026 को भी करीब 409 इसराइली उपनिवेशक मोरक्को गेट के रास्ते अल-अक्सा मस्जिद परिसर के अंदर दाखिल हुए थे।
यरूशलम गवर्नरेट ने जताई कड़ी आपत्ति
इस पूरी गतिविधि पर यरूशलम गवर्नरेट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है और इसे इलाके में अपनी स्थिति मजबूत करने की साजिश बताया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कृत्यों से उस क्षेत्र का यहूदीकरण करने की कोशिश की जा रही है, जो इस इलाके के ऐतिहासिक और कानूनी स्वरूप के खिलाफ है। आपको बता दें कि बाब अल-रहमा कब्रिस्तान एक संरक्षित इस्लामिक संपत्ति यानी वक्फ बोर्ड के अधीन है। हालांकि, इसराइल नेचर एंड पार्क्स अथॉरिटी साल 1974 से इस जगह के कुछ हिस्सों पर अपना प्रशासनिक अधिकार जताती आ रही है और इसे यरूशलम वॉल्स नेशनल पार्क का हिस्सा मानती है।
बस्ती मामलों के विशेषज्ञ का बयान
बस्तियों के मामलों पर नजर रखने वाले शोधकर्ता Mahmoud Al-Saifi ने 10 सितंबर को दिए अपने बयान में कहा कि यह सब कुछ सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। इसका मकसद फिलिस्तीनी लोगों को वहां से हटाना और जमीन पर अपना कब्जा पक्का करना है। फिलिस्तीन की सुप्रीम फतवा काउंसिल ने भी साल 2025 के नवंबर महीने में चेतावनी दी थी कि ऐसे कदमों का उद्देश्य इस जगह को एक बाइबिल गार्डन में बदलना है, जो मृत लोगों के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।
सुरक्षा पाबंदियों के बावजूद पहुंचे हजारों लोग
इसराइली सेना की तरफ से इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और कई तरह की पाबंदियां भी लगाई गई थीं। इसके बावजूद हजारों की संख्या में आम फिलिस्तीनी नागरिक शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए अल-अक्सा मस्जिद पहुंचे। तनाव का माहौल होने के बाद भी लोगों ने अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन जारी रखा। स्थानीय जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से आने वाले दिनों में और ज्यादा तनाव बढ़ सकता है, जिस पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।