Jerusalem: फ़्रेंच नन पर हमला करने वाला यहूदी सेटलर कोर्ट से बरी, मानसिक बीमारी का दिया हवाला

जेरूसलम की एक अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को एक 48 वर्षीय फ़्रेंच कैथोलिक नन पर हमला करने वाले यहूदी सेटलर को मानसिक रूप से अस्वस्थ मानते हुए बरी कर दिया है। जेरूसलम मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज Ophir Tischler ने 26 अगस्त 2026, बुधवार को यह फ़ैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि आरोपी मानसिक बीमारी के कारण अपने कृत्यों के लिए आपराधिक रूप से ज़िम्मेदार नहीं है। इस फ़ैसले के बाद से स्थानीय लोगों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है कि किस तरह से धार्मिक स्थलों के पास इस तरह की हिंसा सामने आ रही है।
घटना की पूरी जानकारी और कोर्ट का फ़ैसला
अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, आरोपी की पहचान 36 वर्षीय यहूदी सेटलर Yona Simcha Schreiber के रूप में हुई है, जो वेस्ट बैंक के पेड्वेल सेटलिंग इलाके का रहने वाला है। जिला मनोचिकित्सक की रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने पाया कि आरोपी सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित था और घटना के समय उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इस आधार पर इस्राइल के दंड कानून की धारा 34H के तहत उसे पागलपन की श्रेणी में रखा गया है। जेल भेजने के बजाय अदालत ने उसे अधिकतम 6 साल के लिए मानसिक अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया है, हालांकि स्वास्थ्य में सुधार होने पर मेडिकल कमेटी उसे समय से पहले भी रिहा कर सकती है।
घटना कैसे हुई और क्या था मामला
यह हमला जेरूसलम के पुराने शहर के बाहर माउंट जियॉन के पास हुआ था। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया था कि आरोपी पीछे से आया और फ़्रेंच स्कूल ऑफ़ बिब्लिकल एंड आर्कियोलॉजिकल रिसर्च की एक शोधकर्ता और नन को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। गिरने के बाद नन के सिर में चोट आई और आरोपी ने उन पर लात से भी हमला किया। इस घटना में नन के चेहरे और पैर पर गंभीर चोटें आईं जिन्हें तुरंत इलाज की ज़रूरत पड़ी। प्रॉसिक्यूटर ने मई महीने में ही आरोपी पर धार्मिक समूह के प्रति दुश्मनी के कारण चोट पहुंचाने और आम मारपीट का मामला दर्ज किया था। अधिकारियों का कहना था कि आरोपी ने नन के धार्मिक पहनावे को देखकर ही उन्हें निशाना बनाया था। बीच-बचाव करने आए एक राहगीर पर भी आरोपी ने हमला कर दिया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी का पक्ष वकील Idan Gamliel ने रखा। फ़्रेंच स्कूल ऑफ़ बिब्लिकल एंड आर्कियोलॉजिकल रिसर्च के निदेशक Father Olivier Poquillon ने इस घटना को बिना किसी उकसावे के सांप्रदायिक हिंसा का एक गंदा रूप बताया। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी निंदा हुई है और जेरूसलम स्थित फ़्रेंच कंसुलेट ने भी इस पर औपचारिक बयान जारी किया है। इसके अलावा, हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ़ जेरूसलम के ह्यूमैनिटीज़ विभाग ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया है। उनका कहना है कि यह हमला जेरूसलम और पवित्र भूमि में ईसाई समुदाय के प्रति बढ़ती शत्रुता के एक खतरनाक ट्रेंड को दर्शाता है, जिसे रॉसिंग सेंटर फॉर एजुकेशन एंड डायलॉग जैसी संस्थाओं ने भी दस्तावेज़ित किया है।