नेपाल में केपी शर्मा ओली का बड़ा बयान, जेन-जी प्रदर्शनों के बाद हुई हिंसा को बताया देश की अर्थव्यवस्था पर हमला.

नेपाल की राजनीति में एक बार फिर से पिछले साल हुई हिंसा को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है और सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने इस पर अपना कड़ा रुख साफ किया है। काठमांडू से मिली जानकारी के मुताबिक, सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर, 2025 को देश के इतिहास में एक भयानक तबाही का दिन बताया है। उनका कहना है कि जेन-जी प्रदर्शनों के बाद जो हिंसा भड़की थी, वह राज्य, लोकतंत्र और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद पर एक बहुत बड़ा हमला थी। इस मामले को लेकर उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया है जिसमें उन्होंने पूरी घटना पर विस्तार से अपनी बात रखी है और लोगों से देश में शांति बनाए रखने की अपील की है।
शांतिपूर्ण आंदोलन में आपराधिक समूहों की घुसपैठ
ओली ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि जेन-जी आंदोलन की शुरुआत 8 सितंबर को पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से हुई थी। देश के युवा मुख्य रूप से सुशासन की मांग को लेकर और सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों जैसे जरूरी मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। नेपाल का संविधान देश के सभी नागरिकों को पूरी तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। लेकिन स्थिति तब बिगड़ी जब कुछ आपराधिक तत्वों और समूहों ने इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के भीतर अपनी पैठ बना ली। उन्होंने जानबूझकर इस पूरे आंदोलन को हिंसक रूप दे दिया ताकि देश में अराजकता फैलाई जा सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवा प्रदर्शनकारियों को सोची-समझी साजिश के तहत चारों तरफ से घेरा गया और उन्हें जबरन संसद भवन की तरफ धकेल दिया गया। वहां हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गए और दुर्भाग्यपूर्ण गोलीबारी में कई लोगों की अपनी जान गंवानी पड़ी। इस दौरान उन्होंने आंदोलन में मारे गए बेकसूर युवाओं और अपनी ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को भी याद किया। उन्होंने उन सभी के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और जो लोग इस हिंसा में घायल हुए थे और अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं, उनके जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना भी की।
राष्ट्रपति भवन और संसद पर हुए हमलों का जिक्र
केपी शर्मा ओली ने आगे कहा कि 9 सितंबर को जो घटनाएं हुईं, वे पिछले दिन हुई मौतों से पैदा हुए गुस्से और आक्रोश से बहुत आगे निकल चुकी थीं। उन्होंने देश के महत्वपूर्ण ठिकानों और इमारतों का जिक्र करते हुए बताया कि उस दौरान राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सिंहदरबार, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यालयों और कई सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। उन जगहों पर बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की गई, सामानों की लूटपाट हुई, आगजनी की गई और भारी जनहानि देखने को मिली।
ओली का साफ तौर पर यह मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में हुई तबाही को केवल पिछले दिन हुई मौतों पर आई किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में बिल्कुल भी नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने इन सभी घटनाओं को एक बेहद खतरनाक साजिश का परिणाम करार दिया। उनके अनुसार, इस पूरी साजिश का मुख्य उद्देश्य नेपाल के राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था के प्रगतिशील रास्ते को पूरी तरह से पलटना था। वे देश को वापस से निरंकुशता और गहरी अराजकता की तरफ धकेलना चाहते थे, जिसे समय रहते पहचानना और रोकना बहुत जरूरी है।
दोषियों को अब तक सजा क्यों नहीं मिली
उन्होंने अपनी बात रखते हुए एक बड़ा सवाल यह भी उठाया कि इस भयानक तबाही और हिंसा के लिए जो लोग सीधे तौर पर जिम्मेदार थे, उन्हें अब तक जवाबदेह क्यों नहीं बनाया गया है। ओली ने जनता के बीच यह सवाल पूछा कि 9 सितंबर की इस तबाही के आरोपियों को अभी तक खुली छूट क्यों दी जा रही है और इस मामले से जुड़ी जांच रिपोर्टों को गोपनीय क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने माना कि युवा प्रदर्शनकारियों की चिंताएं और उनकी मांगें बिल्कुल वास्तविक थीं, लेकिन जेन-जी आंदोलन के नाम पर जो हिंसा फैलाई गई, उसका फायदा देश विरोधी अन्य ताकतों ने उठाया।
उन्होंने देश की जनता को चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं के भीतर असंतोष आज भी काफी व्यापक स्तर पर मौजूद है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि पिछले साल की तरह वैसी दर्दनाक घटनाओं को दोबारा कभी भी दोहराने न दिया जाए। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों के खिलाफ समाज में नफरत तथा बदले की भावना फैलाने वाले लोगों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने साफ शब्दों में चेताया कि ऐसी नकारात्मक गतिविधियां देश को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के बजाय और अधिक पीछे धकेल देंगी।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील
देश की जनता और राजनीतिक दलों से अपील करते हुए केपी शर्मा ओली ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होने के लिए कहा। उन्होंने देश के सभी देशभक्त, लोकतांत्रिक, प्रगतिशील, वामपंथी ताकतों और शांति की चाह रखने वाले आम नागरिकों से अपील की कि वे सब मिलकर संविधान, राष्ट्रीय हितों और नेपाल की संप्रभुता की रक्षा के लिए एक मंच पर खड़े हों। उन्होंने देश की आम जनता से आह्वान किया कि 9 सितंबर की बरसी को वे लोग दण्डहीनता और अराजकता के खिलाफ अपनी मजबूत प्रतिबद्धता जताने का अवसर बनाएं। साथ ही, उन्होंने सभी से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और एक समृद्ध नेपाल के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का अनुरोध किया।