Kuwait और Pakistan के बीच बड़ा समझौता, स्ट्रैटेजिक फ्यूल स्टोरेज के लिए हुई अहम बातचीत

Nura Basta3 September 20262 min read44 viewsKuwait
Kuwait और Pakistan के बीच बड़ा समझौता, स्ट्रैटेजिक फ्यूल स्टोरेज के लिए हुई अहम बातचीत

कुवैत और पाकिस्तान के रिश्ते इन दिनों ऊर्जा सुरक्षा को लेकर काफी मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। इसी कड़ी में 3 सितंबर 2026 को कुवैत के सीमा शुल्क यानी कस्टम विभाग के महान डायरेक्टर जनरल ने पाकिस्तान के राजदूत से खास मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा शुल्क से जुड़े मामलों में आपसी तालमेल और सहयोग को और ज्यादा बेहतर बनाना था ताकि भविष्य में व्यापारिक रिश्ते और मजबूत हो सकें।

पाकिस्तान की नई ऊर्जा नीति और स्ट्रेटेजिक फ्यूल स्टोरेज

पाकिस्तान इन दिनों अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रहा है। पाकिस्तान सरकार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आने वाले ईंधन शिपमेंट पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहती है। इसके लिए देश में बांडेड फ्यूल स्टोरेज सुविधाएं स्थापित करने की बातचीत चल रही है। इस योजना के तहत पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि Kuwait Petroleum Corporation (KPC) सहित कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियां इस पहल में गहरी रुचि दिखा रही हैं। इस प्रोजेक्ट में आने वाले समय में अरबों डॉलर का निवेश होने की पूरी संभावना है।

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आर्थिक समन्वय समिति का नया प्लान

यह पूरा कदम पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद द्वारा पिछले महीने की गई नीतिगत समीक्षा के बाद उठाया गया है। पाकिस्तान की Economic Coordination Committee (ECC) द्वारा 24 अगस्त 2026 को एक खास योजना को मंजूरी दी गई थी। इस नए नियम के तहत विदेशी सप्लायरों को पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पाद आयात करने, कस्टम-बांडेड सुविधाओं के भीतर उनका मालिकाना हक रखने और बाद में घरेलू बाजार में बेचने या फिर दोबारा निर्यात करने की पूरी अनुमति मिलती है। हालांकि, इस नीति को अभी फेडरल कैबिनेट से आखिरी हरी झंडी मिलना बाकी है।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े निवेशकों ने यह साफ कर दिया है कि जैसे ही इस नीति का अंतिम प्रारूप पूरी तरह से पास हो जाएगा, वे बिना किसी देरी के काम शुरू कर देंगे। एक निवेशक ने जानकारी दी कि नीति का फाइनल दस्तावेज मिलते ही उनकी कंपनी अगले छह महीने के भीतर पाकिस्तान में एक से दो मिलियन टन ईंधन का स्टॉक तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। शुरुआत में काम मौजूदा स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ही किया जाएगा और बाद में नए टर्मिनल बनाने का काम शुरू होगा।

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