Kuwait Jleeb Al Shuyoukh Evacuation: कुवैत में बड़ी कार्रवाई से 2.8 लाख लोग हुए बेघर, अब किराए में भारी उछाल.

कुवैत के Jleeb Al Shuyoukh इलाके में सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ा खाली कराने का अभियान चलाया गया है। इस कार्रवाई की वजह से लगभग 280,000 लोग बेघर हो गए हैं, जिनमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के रहने वाले बहुत सारे प्रवासी मजदूर शामिल हैं। सरकार ने यह बड़ा कदम इसलिए उठाया ताकि इमारतों की खस्ता हालत, गैर-कानूनी कामों और जरूरत से ज्यादा भीड़भाड़ जैसी समस्याओं को पूरी तरह से खत्म किया जा सके। इलाके को खाली कराने के बाद अब यह चिंता सताने लगी है कि आसपास के दूसरे इलाकों में फिर से नई और भीड़भाड़ वाली झुग्गियां न बस जाएं।
आसपास के इलाकों पर बढ़ा भारी दबाव
Arab Times और Al-Jarida की रिपोर्ट के मुताबिक, घर छोड़ने वाले बहुत से लोग अब Farwaniya और Khaitan में रहने के लिए जा रहे हैं। आपको बता दें कि फारवानिया में पहले से ही 311,000 प्रवासी रहते हैं और खैतान में 191,000 प्रवासी पहले से ही अपना डेरा डाले हुए हैं। इसके अलावा कुछ लोग Riggae, Mahboula, Hawally और Salmiya की तरफ भी निकल पड़े हैं। लोगों के इस तरह अचानक एक जगह से दूसरी जगह जाने की वजह से उन इलाकों की बुनियादी सुविधाओं और घरों की उपलब्धता पर बहुत ज्यादा असर पड़ रहा है।
किराए में हुई भारी बढ़ोतरी और रहने की समस्या
कुवैत के एक बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक, इस भगदड़ और बसावट के बाद वहां के मकानों के किराए में काफी तेजी आ गई है। इस बड़ी कार्रवाई से पहले फारवानिया में महीने का किराया 280 से 400 कुवैती दीनार के बीच चल रहा था और खैतान में 290 से 410 कुवैती दीनार था। अगस्त के महीने में इन सभी इलाकों में किराए में कम से कम 20 दीनार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कुछ जगहों पर एक ही कमरे में 8 से 10 लोग एक साथ रहने को मजबूर हैं। ऐसे कमरों में केवल सोने की जगह यानी बेड स्पेस का किराया 40 से 50 दीनार प्रति महीना वसूला जा रहा है।
प्रवासियों के सामने खड़ी हुई नई परेशानियां
Al-Jarida अखबार ने पहले ही चेतावनी दी है कि ये इलाके जरूरत से ज्यादा भीड़भाड़ होने की वजह से कहीं 'अगला जीब' न बन जाएं। इन इलाकों में रहने वाले प्रवासियों को जिंदगी जीने के बढ़ते खर्च, अत्यधिक आबादी, स्कूलों की ज्यादा दूरी, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्थानीय अपराध दर बढ़ने जैसी कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जब सरकार ने यह इलाका खाली कराया था, तब कुछ समय के लिए रहने की जगह दी गई थी, लेकिन इन प्रभावित लोगों के लिए अभी तक रहने का कोई पक्का और लंबा इंतजाम नहीं किया गया है। स्थानीय अखबारों और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अभी भी लगातार बातचीत हो रही है और हर कोई अपनी चिंता जाहिर कर रहा है।