Kuwait में बड़ा फैसला, सरकारी स्कूलों से निकाले गए 7,019 expatriate टीचर्स, सरकार को होगी भारी बचत.

कुवैत सरकार ने सरकारी स्कूलों में काम करने वाले विदेशी शिक्षकों को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। Kuwait Ministry of Education ने सरकारी स्कूलों से कुल 7,019 expatriate टीचर्स की सेवा समाप्त कर दी है। यह पूरी प्रक्रिया 8 सितंबर से 9 सितंबर 2026 के बीच शुरू की गई थी। नौकरी से निकाले गए इन शिक्षकों को आधिकारिक सरकारी पोर्टल Sahel App के माध्यम से 'Contract Termination Notice' भेजे जा रहे हैं। कुवैत सरकार का यह कदम देश में शिक्षकों के सरप्लस को कम करने की योजना का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार को हर साल करीब KD 42 million यानी भारतीय मुद्रा में 1,150 crore INR से ज्यादा की बचत होने की उम्मीद है।
कटेगी किन लोगों की नौकरी और क्या है चयन का आधार
नौकरी गंवाने वाले इस समूह में 1,551 पुरुष यानी 22% और 5,468 महिलाएं यानी 78% शामिल हैं। इन छंटनी की जद में मुख्य रूप से शारीरिक शिक्षा, इस्लामिक स्टडीज, अरबी, अंग्रेजी, कला, संगीत और गणित जैसे विषय आए हैं। शिक्षकों का चयन उनकी वरिष्ठता के आधार पर किया गया है, जिसमें सबसे पहले उन लोगों को हटाने को प्राथमिकता दी गई जिन्हें नौकरी पर सबसे पहले रखा गया था। वर्तमान में कुवैत की शिक्षण कार्यफोर्स में 70.6% कुवैती नागरिक, 10.1% खलीज और बीडून, और 19.3% अन्य अरब और अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि के लोग शामिल हैं। ताजा छंटनी सिर्फ इसी 19.3% गैर-राष्ट्रीय श्रेणी तक सीमित रखी गई है। प्रभावित होने वाले इन शिक्षकों में भारत, मिस्र, पाकिस्तान, सूडान और जॉर्डन जैसे देशों के लोग शामिल हैं।
शिक्षा मंत्री का निर्देश और स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता
कुवैत के शिक्षा मंत्री Adel Al-Tabtabaei ने सभी विभागों को इस योजना को तुरंत लागू करने का सख्त निर्देश दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य उन विषयों में 'Kuwaitization' को बढ़ावा देना है, जहां स्थानीय उम्मीदवार आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। हालांकि जिन विषयों में अभी भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है, वहां पर नई भर्तियां आगे भी जारी रहेंगी। मंत्रालय की तरफ से यह भी साफ किया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सभी कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों पूरी तरह से सुरक्षित रखे जाएंगे और नियमों के मुताबिक उनका हिसाब किया जाएगा।
प्रवासी परिवारों पर असर और भारतीय समुदाय के लिए चिंता
इस बड़े फैसले की वजह से कुवैत में रह रहे प्रवासी परिवारों के सामने बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। नौकरी जाने का सीधा असर उनके वीजा स्टेटस, रेजिडेंसी और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। भारत की बात करें तो कुवैत में लगभग 10 lakh भारतीयों की बड़ी आबादी रहती है, जिनमें से बहुत से लोग टीचर, नर्स और इंजीनियर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में इस फैसले का भारतीय परिवारों पर भी काफी गहरा प्रभाव पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि जिन लोगों के पास भी नोटिस आया है, वे तुरंत Sahel app पर जाकर अपने कॉन्ट्रैक्ट स्टेटस, पेमेंट स्लिप और कानूनी दस्तावेजों की अच्छी तरह से जांच कर लें। जरूरत पड़ने पर वे कुवैत स्थित भारतीय दूतावास से भी संपर्क करके मदद ले सकते हैं ताकि उन्हें सही मार्गदर्शन मिल सके।