Kuwait: लेबर शिकायत और 'रिपोर्ट मी' में है बड़ा अंतर, कुवैत प्रशासन ने दी ज़रूरी जानकारी.

कुवैत में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और अन्य विदेशी कामगारों के लिए पब्लिक अथॉरिटी फॉर मैनपावर ने एक बेहद जरूरी और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया है। कुवैत के इस सरकारी विभाग ने 6 सितंबर 2026 को यह साफ किया कि लेबर शिकायत सेवा और रिपोर्ट मी यानी बालाघनी सेवा के कानूनी काम पूरी तरह से अलग हैं। बहुत से कामगार इन दोनों सेवाओं को एक ही समझ लेते हैं और गलत जगह पर अपनी शिकायत दर्ज करा देते हैं, जिससे उनके मामलों में बेवजह की देरी होती है। कुवैत में काम करने वाले करीब 10 लाख भारतीय प्रवासियों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि किस समस्या के लिए किस सरकारी दरवाजे पर जाना है ताकि उनकी परेशानी का सही और समय पर समाधान हो सके।
लेबर शिकायत और रिपोर्ट मी में क्या है फर्क
अगर किसी कर्मचारी को अपने मालिक या कंपनी से जुड़ी कोई सीधे तौर पर व्यक्तिगत परेशानी है, तो उसे हमेशा फॉर्मल लेबर शिकायत सेवा का ही इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसी समस्याओं में मुख्य रूप से रुक हुआ वेतन, नौकरी का अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट विवाद, अचानक नौकरी से निकालना, या फिर सालाना छुट्टी जैसे कानूनी फायदों से वंचित किया जाना शामिल है। इन सभी मामलों की शिकायत के लिए कामगारों को उस लेबर रिलेशन यूनिट में जाना होता है जो उनके मालिक की फाइल संभालती है। इसके अलावा इसे आशाल मैनपावर इलेक्ट्रॉनिक सर्विस के जरिए भी ऑनलाइन जमा किया जा सकता है। प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि रिपोर्ट मी सेवा किसी भी तरह के व्यक्तिगत वित्तीय दावों या आपसी विवादों को सुलझाने के लिए नहीं बनी है।
कहाँ और कैसे करें नियमों के उल्लंघन की रिपोर्ट
दूसरी तरफ, रिपोर्ट मी या बालाघनी सेवा का इस्तेमाल केवल श्रम बाजार के उन बड़े उल्लंघनों की रिपोर्ट करने के लिए किया जाता है जो सीधे तौर पर श्रम प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस सेवा का उपयोग करने के लिए कामगारों को अपने मोबाइल में साह़ेल एप्लीकेशन का उपयोग करना होता है। इस ऐप के जरिए बिना लाइसेंस वाली भर्ती एजेंसियों, अवैध रूप से काम पर रखने, काम की जगह पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने या श्रम कानूनों के बड़े उल्लंघनों की शिकायत की जा सकती है। शिकायत करने वाला व्यक्ति अपनी बात को साबित करने के लिए फोटो या अन्य सबूत भी साथ में जोड़ सकता है। सरकार यह भरोसा देती है कि शिकायत करने वाले की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और किसी को भी उसका नाम पता नहीं चलेगा।
दलालों और फर्जी एजेंटों से रहने की जरूरत है सावधान
कुवैत प्रशासन ने सभी कामगारों को यह सख्त चेतावनी दी है कि वे किसी भी तीसरे पक्ष के बिचौलियों, व्हाट्सएप एजेंटों या सोशल मीडिया पेजों के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें। ये लोग अक्सर पैसे लेकर काम जल्दी करवाने का झूठा वादा करते हैं और भोले-भाले प्रवासियों को ठग लेते हैं। कामगारों को अपनी बेहद संवेदनशील जानकारी जैसे कि अपनी सिविल आईडी का विवरण, पासपोर्ट नंबर और लॉगिन पासवर्ड किसी के साथ भी शेयर नहीं करना चाहिए। हमेशा केवल आधिकारिक सरकारी चैनलों का ही उपयोग करना समझदारी है। इसके अलावा कामगारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पास हमेशा अपने रोजगार अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट, सैलरी मिलने का रिकॉर्ड और कंपनी के साथ हुई बातचीत के कागजात संभाल कर रखें ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें सबूत के तौर पर दिखाया जा सके।
भारतीय दूतावास से ऐसे लें मदद
कुवैत में रहने वाले भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भारतीय दूतावास का लेबर विंग लगातार काम करता है और जरूरी मार्गदर्शन प्रदान करता है। दूतावास का यह लेबर विंग रविवार से गुरुवार तक काम करता है और इसके खुलने का समय सुबह 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक तथा दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक का है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में भारतीय नागरिक दूतावास के फोन नंबर +965-22562151 पर संपर्क कर सकते हैं। जिन भारतीय कामगारों को बहुत ज्यादा शोषण का सामना करना पड़ रहा है, जिनका पासपोर्ट कंपनी ने रख लिया है, या जिन्हें किसी भी प्रकार की कांसुलर सहायता चाहिए, वे स्थानीय श्रम प्राधिकरण के साथ-साथ दूतावास के हेल्प डेस्क या लेबर कंप्लेंट्स डेस्क से भी संपर्क कर सकते हैं।