Kuwait Tanker Attack: होर्मुज जलडमरूमध्य में कुवैत के तेल टैंकर को बनाया गया निशाना, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड पर लगे आरोप.

Praggya Singh sabal27 August 20263 min read43 viewsKuwait
Kuwait Tanker Attack: होर्मुज जलडमरूमध्य में कुवैत के तेल टैंकर को बनाया गया निशाना, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड पर लगे आरोप.

फारस की खाड़ी में सुरक्षा की स्थिति एक बार फिर से बेहद गंभीर हो गई है। हाल ही में मिली रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त 2026 को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे कुवैत के एक तेल टैंकर को अपना निशाना बनाया। इस घटना की सबसे पहले जानकारी Daily Iran News ने दी थी, जिसके बाद ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस फर्म OSINT613 ने भी इस बात की पुष्टि की। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका की तरफ से तेहरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का ऐलान किया गया था। इस तरह की घटनाओं से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और आम लोगों के बीच चिंता का माहौल लगातार बढ़ रहा है।

समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता

क्षेत्रीय सुरक्षा का हाल बहुत ज्यादा तनावपूर्ण चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी IMO ने मौजूदा संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक खाड़ी क्षेत्र में कुल 68 समुद्री घटनाओं को दर्ज किया है। इन सभी घटनाओं में कम से कम 20 नाविकों की जान जा चुकी है और 35 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र यानी UKMTO ने इनमें से 47 घटनाओं को सीधे तौर पर हमले की श्रेणी में रखा है। इससे पहले 24 अगस्त 2026 को ओमान के तट के पास लाइबेरिया में रजिस्टर्ड 'मेट्रो वेनेशियन' नाम का टैंकर किसी अज्ञात चीज के टकराने से खराब हो गया था। हालांकि कुवैत के अधिकारियों की तरफ से इस हालिया हमले पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन देश ने पहले भी समुद्री सुरक्षा को लेकर कड़ा विरोध जताया था। उदाहरण के लिए, 21 जुलाई 2026 को 'कैफान' टैंकर पर हुए हमले के बाद कुवैत ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई थी, जिसमें कुछ नाविक घायल हो गए थे।

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व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट

राजनयिक स्तर पर तनाव को कम करने के लिए ईरान और ओमान ने मिलकर एक प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में कमर्शियल शिपिंग यानी व्यापारिक जहाजों के आने-जाने के लिए एक अस्थायी गलियारा बनाने की बात कही गई थी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबबादी ने यह भी साफ किया था कि इस ट्रांजिट प्लान में किसी भी तरह के सैन्य जहाजों को शामिल नहीं किया जाएगा। इन तमाम कोशिशों के बावजूद क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही में बहुत ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। 26 अगस्त को होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल 5 कमोडिटी जहाजों ने ही पार किया, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत 15 जहाजों का था।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

ये सारी घटनाएं अमेरिका द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के बाद सामने आई हैं। 24 अगस्त को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की घोषणा की थी, जिसके तहत ईरानी तेल ले जाने वाले नेटवर्क्स पर नए प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके अगले दिन यानी 25 अगस्त को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बयान दिया था कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय पानी से बारूदी सुरंगों को साफ कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ, IRGC के एक प्रवक्ता ने दावा किया था कि अगर अमेरिका अपनी बाधाएं डालना बंद कर दे तो इस जलमार्ग को पूरी तरह से दोबारा खोला जा सकता है। इस पूरी स्थिति पर अधिक जानकारी के लिए आप QNA News की आधिकारिक रिपोर्ट देख सकते हैं।

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