ईरान के लामर्ड में खेल हॉल पर हुए हमले के महीनों बाद पीड़ितों के परिवार मांग रहे न्याय.

ईरान के لامर्ड (Lamerd) शहर में एक खेल हॉल पर हुए घातक हमले के कई महीने बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है। इस भयानक हमले में अपने मासूम बच्चों को खोने वाले परिवार आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अल जज़ीर के रिपोर्टर तोहिद असदी (Tohid Asadi) ने इस घटना के बाद बचे लोगों के दिलों पर पड़े गहरे घावों और उनके लगातार जारी दर्द को दुनिया के सामने रखा है। यह हमला ईरान में युद्ध के पहले दिन यानी 28 फरवरी 2026 को हुआ था, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
हमले में गई कई मासूमों की जान
ईरान के विदेश मंत्रालय द्वारा अगस्त 2026 में जारी की गई रिपोर्ट जिसका शीर्षक 'क्राइम एट 5:10 पीएम' (Crime at 5:10 pm) है, के अनुसार इस हमले में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई थी और लगभग 170 लोग घायल हुए थे। यह हमला उस जगह पर हुआ था जहां लड़कियों की एक वॉलीबॉल टीम अभ्यास कर रही थी। इस दर्दनाक हादसे में 11 साल की एलहम और 10 साल की हेल्मा जैसी बच्चियों की भी जान चली गई। उसी समय एक खुले फुटबॉल मैदान पर हुए एक अन्य हमले में दो बच्चों और उनके कोच की मौत हो गई थी, जहां आठ से बारह साल की उम्र के 17 से 18 बच्चे खेल रहे थे। इस पूरी घटना में सबसे कम उम्र की पहचान की गई मृतका सिर्फ दो साल की अविना बारजेगार (Avina Barzegar) थीं। इसके बाद हुए हमलों में आस-पास के रिहायशी इलाके और स्कूल के पास का हॉल भी निशाना बना, जिससे लोगों को गंभीर चोटें और फ्रैक्चर आए।
हथियारों के इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय जांच पर सवाल
द न्यूयॉर्क टाइम्स (The New York Times), बीबीसी वेरिफाई (BBC Verify) और एयरवार्स (Airwars) की स्वतंत्र जांच में यह सामने आया कि इस हमले में अमेरिका में बने प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि अमेरिकी सेना ने ईरान में PrSM के इस्तेमाल की बात तो स्वीकार की, लेकिन सेंटकॉम (CENTCOM) के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स (Tim Hawkins) ने लामर्ड हमले की जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वहां इस्तेमाल किया गया हथियार ईरान की ही होवेजेह क्रूज मिसाइल जैसा दिखता था। वहीं दूसरी ओर इज़राइल ने भी उस दिन उस शहर में किसी भी तरह के हमले से इनकार किया है।
युद्ध अपराध और आधिकारिक बयान
12 सितंबर 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई (Esmaeil Baghaei) ने इस हमले को एक स्पष्ट युद्ध अपराध करार दिया। उन्होंने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि इसमें एक प्रतिबंधित क्लस्टर मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था जिसमें 1,80,000 टुकड़े मौजूद थे। इसके अलावा ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी आरोप लगाया कि हमले की भयावहता को बढ़ाने के लिए रासायनिक हथियारों का भी प्रयोग किया गया था। न्याय की मांग कर रहे परिवारों के बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी 8 सितंबर 2026 को एक अलग बयान जारी किया। इसमें घनी आबादी वाले इलाकों में अमेरिकी और इज़रायली सैन्य कार्रवाइयों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई ताकि यह साफ हो सके कि क्या ये कार्रवाइयां युद्ध अपराध के दायरे में आती हैं या नहीं।