West Bank: वेस्ट बैंक बना कानूनहीन भूमि, लैटिन पैट्रार्क के बयान से मची हलचल और बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव.

यरुशलम के लैटिन पैट्रार्क कार्डिनल पियरबैटिस्टा पिज़ाबल्ला ने वेस्ट बैंक के हालातों को लेकर एक बहुत बड़ा और चिंताजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वेस्ट बैंक अब पूरी तरह से एक कानूनहीन भूमि बन चुका है जहां आम लोगों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस गंभीर बयान के सामने आने के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दुनिया भर के नेता इस मामले पर अपनी कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
कानून और सुरक्षा का पूरी तरह से अभाव
इटली के रिमिनी में आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान कार्डिनल ने यह बात साझा की कि इजरायली बस्तियों के लोगों और फिलिस्तीनी नागरिकों के बीच तनाव लगातार खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस बढ़ते तनाव को रोकने के लिए वहां कोई भी प्रभावी कानूनी या सुरक्षा से जुड़ा नियम काम नहीं कर रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए केवल दो-राष्ट्र समाधान ही एकमात्र ऐसा रास्ता बचा है जिससे दोनों पक्षों के लोगों को अपने ही देश में सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिल सके। इसके अलावा उन्होंने गाजा के मौजूदा मानवीय संकट को भी अत्यंत दयनीय और तबाह बताया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अमेरिकी सांसदों की चिंता
यह पूरा मामला ऐसे समय में गरमाया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इस पर अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी। परिषद ने वेस्ट बैंक की स्थिति को बेहद डरावना बताया क्योंकि वहां बड़े पैमाने पर बस्तियों पर हमले हो रहे हैं और अपराधियों के खिलाफ कोई जवाबदेही तय नहीं की जा रही है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इजरायली सुरक्षा बल कई मौकों पर फिलिस्तीनी नागरिकों की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं और कुछ मामलों में तो उन्होंने हिंसा का समर्थन या उसमें हिस्सा भी लिया है। इसके साथ ही, इजराइल सरकार की तरफ से पूर्वी यरुशलम के ई1 क्षेत्र में 1,200 से अधिक नए आवास यूनिटों के निर्माण के लिए टेंडर खोलने के फैसले की भी कड़ी आलोचना की गई है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी सीनेट के डेमोक्रेट सांसदों ने भी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक पत्र लिखकर बस्तियों में हो रही हिंसा और अंधाधुंध गिरफ्तारियों को तुरंत रोकने की अपील की है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2026 में बस्तियों के कारण होने वाली हिंसक मौतें पिछले साल यानी 2025 के आंकड़े को पहले ही पार कर चुकी हैं, जो कि बेहद डराने वाली बात है।
अंतरराष्ट्रीय नेताओं की कड़ी आपत्ति
वेस्ट बैंक में तनाव और नई बस्तियों के निर्माण की योजनाओं के खिलाफ वैश्विक नेता खुलकर सामने आ रहे हैं। इस कड़ी में आयरलैंड भी ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों के साथ मिलकर एक साझा बयान में शामिल हो गया है। इन सभी देशों के नेताओं ने संयुक्त रूप से ई1 क्षेत्र में बस्तियों की योजनाओं को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह अवैध करार दिया है। इन सभी देशों की सरकारों और यूरोपीय आयोग ने यूके सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार चेतावनी दी है कि इस तरह की योजनाएं दो-राष्ट्र समाधान की उम्मीदों को पूरी तरह खत्म कर देंगी। अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इजराइल सरकार से तुरंत इन निर्माण प्रस्तावों को वापस लेने की मांग की है ताकि इस प्रक्रिया में शामिल होने वाली कंपनियों और संस्थाओं पर किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई या प्रतिष्ठा को नुकसान से बचाया जा सके।