Lucknow News: मोबाइल ईएमआई न चुकाने पर मजदूर का अपहरण, जबरन खून निकलवाने का मामला आया सामने

लखनऊ के निगोहां इलाके से एक बेहद चौंकाने और डरावनी घटना सामने आई है, जहां मोबाइल की किस्त न चुकाने पर एक गरीब मजदूर को पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और उससे जबरन काम कराने के साथ ही खून तक निकाल लिया गया। इस सनसनीखेज मामले ने लोन रिकवरी एजेंटों की मनमानी और आम आदमी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने पहले इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और उन्हें डराया-धमकाया, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए उच्च अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक देनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ खुलासा
पीड़ित 27-year-old मजदूर का नाम Naval है, जो मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता है। नवल ने इलाके की Geeta Mobile Shop से एक मोबाइल फोन खरीदा था, जिसकी कुछ किस्तें समय पर नहीं चुकाई जा सकी थीं। किस्त बकाया होने के कारण रिकवरी एजेंटों ने अपनी सारी हदें पार कर दीं। परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि Shubham Singh और उसके दो अज्ञात साथियों ने नवल के साथ बेरहमी से मारपीट की। आरोपियों ने उसे जबरन अगवा किया और पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और एक ब्लड बैंक ले जाकर उसका एक यूनिट खून जबरन निकाल लिया गया ताकि उसे बेचकर पैसे वसूले जा सकें।
पुलिस की लापरवाही और डीसीपी का एक्शन
घटना के बाद जब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाने स्थानीय निगोहां पुलिस थाने गया, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया और उन्हें ही थाने से भगा दिया। पुलिस के इस रवैये से आहत होकर पीड़ित की मां ने हार नहीं मानी और सीधे DCP (South) Mohammad Mushtaq से मुलाकात की। यह मुलाकात Monday, September 14, 2026 को हुई। डीसीपी मोहम्मद मुश्ताक ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत एक्शन लिया और स्थानीय थाने को तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही, स्थानीय पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने शुरुआत में कार्रवाई क्यों नहीं की थी।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने डीसीपी के आदेश के बाद मुख्य आरोपी Shubham Singh और दो अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इनमें मानव तस्करी के लिए 143(3), अवैध श्रम के लिए 146, गलत तरीके से बंधक बनाने के लिए 127(3) और चोट पहुंचाने के लिए 115(2) धाराएं शामिल हैं। पुलिस अब आरोपियों की तलाश कर रही है और मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है ताकि इस तरह की अमानवीय हरकत करने वालों को कड़ी सजा मिल सके।
आरबीआई के नियम और लोन रिकवरी के कायदे
इस खौफनाक घटना ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा लोन रिकवरी एजेंटों के लिए बनाए गए नियमों पर भी रोशनी डाली है। आरबीआई के सख्त निर्देश हैं कि कोई भी रिकवरी एजेंट कर्जदार या उसके परिवार के साथ गाली-गलौज, धमकी या किसी भी प्रकार की बदतमीजी नहीं करेगा। नियम यह भी कहते हैं कि एजेंट सुबह 8:00 a.m. से पहले और शाम 7:00 p.m. के बाद ग्राहक को फोन या संपर्क नहीं कर सकते। इसके अलावा, किसी की निजी जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करना पूरी तरह गैरकानूनी है। कर्जदारों को राहत देने के लिए और सख्ती बढ़ाई गई है, जिसके तहत July 1, 2026 और January 1, 2027 से नए नियम लागू होने हैं। इन नए नियमों के तहत अगर कोई लोन देने वाली कंपनी ईएमआई मिलने के बाद भी मोबाइल डिवाइस को समय पर अनलॉक करने में देरी करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।