अमेरिका में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा भारत बोलने मात्र से विविधता में एकता का होता है अहसास

Nura Basta30 August 20263 min read23 viewsIndia
अमेरिका में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा भारत बोलने मात्र से विविधता में एकता का होता है अहसास

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दुनिया भर के सामने भारत की संस्कृति और उसकी मूल पहचान पर खुलकर बात रखी। उन्होंने कहा कि जब हम संयुक्त राज्य अमेरिका की बात करते हैं तो हमारे मन में बहुलतावाद का विचार आता है, लेकिन जब हम सिर्फ भारत नाम लेते हैं तो विविधता में एकता का अहसास अपने आप हो जाता है। संघ प्रमुख के इस कार्यक्रम का आयोजन 'एहेड फोरम' के तत्वावधान में सार्वभौमिक एकात्मता समारोह के रूप में किया गया था जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे।

राष्ट्र केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डॉ. मोहन भागवत ने बताया कि राष्ट्र केवल जमीन का टुकड़ा या भौगोलिक इकाइयां नहीं होते हैं बल्कि हर राष्ट्र समाज के प्रति एक विशेष दायित्व का निर्वाह करता है। महान संत स्वामी विवेकानन्द ने भी कहा था कि इस दुनिया के हर राष्ट्र के पास संसार को देने के लिए कोई न कोई खास संदेश, एक निश्चित ध्येय और एक बड़ी नियति होती है जिसे उसे पूरा करना होता है। भारत की भी अपनी एक नियति है जिसे वह युगों से निभाता आ रहा है और आगे भी पूरी निष्ठा के साथ निभाता रहेगा।

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भारत की नियति और विविधता का उत्सव

संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि भारत की नियति यही है कि वह विविधता में एकता के इस गहरे सत्य को खुद समझे और समय-समय पर पूरी दुनिया को भी इसका साक्षात्कार कराए। हम सब एक हैं और हमारे बीच मौजूद विभिन्न प्रकार की विविधताएं हमारी इस एकता को और भी ज्यादा सुंदर बनाती हैं। इसलिए हम सबको इस विविधता का सम्मान करना चाहिए, इसे खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए और इसका उत्सव मनाना चाहिए। हमारे शरीर भले ही अलग दिखते हों और हमारे बाहरी रूप-रंग में भिन्नता हो, लेकिन हमारे भीतर एक ऐसी आंतरिक शक्ति है जो हम सबको आपस में जोड़ती है।

विचार करने की क्षमता और मनुष्य का दायित्व

डॉ. मोहन भागवत ने इंसान की खासियत पर जोर देते हुए कहा कि विचार करने की क्षमता ही मनुष्य को बाकी पशुओं से अलग बनाती है। जो लोग सही और गलत यानी उचित और अनुचित का भेद समझते हैं, उनका यह मुख्य कर्तव्य बनता है कि वे इस पूरी दुनिया को संभाल कर रखें और उसकी रक्षा करें। यदि मनुष्य सही दिशा में सोचता है तो वह ईश्वर के करीब पहुंच जाता है, और यदि वह गलत रास्ते पर चलता है तो उसका पतन होने लगता है। इसलिए विचार की सही दिशा होना बहुत जरूरी है जो इंसान को समाज का एक जिम्मेदार नागरिक बनाती है।

प्रवासी भारतीयों के लिए संदेश

अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि जो लोग विदेश में अपनी कर्मभूमि पर रहते हैं उन्हें अपनी उस कर्मभूमि के प्रति पूरी तरह से निष्ठावान रहना चाहिए। इसके साथ ही यदि आपके मन में अपनी जन्मभूमि यानी भारत के लिए कुछ करने की प्रबल इच्छा है तो आपको उन जीवन मूल्यों के साथ जीना चाहिए जो भारत ने आपको दिए हैं। भारत ने दुनिया को हमेशा 'जियो और जीने दो' का संदेश दिया है। हमारा यह दायित्व बनता है कि हम इस संदेश को सिर्फ भाषणों या उपदेशों के जरिए नहीं बल्कि अपने रोजमर्रा के आचरण से पूरी दुनिया तक पहुंचाएं ताकि पूरी मानवता का कल्याण हो सके।

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