RSS प्रमुख मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा, पीपुल-टू-पीपुल संवाद पर जोर और 310 संगठनों का मिला समर्थन.

Nura Basta4 September 20263 min read20 viewsIndia
RSS प्रमुख मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा, पीपुल-टू-पीपुल संवाद पर जोर और 310 संगठनों का मिला समर्थन.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत इन दिनों ब्रिटेन के दौरे पर हैं। यह दौरा 2 से 7 सितंबर तक चल रहा है और इस यात्रा के दौरान लोगों के बीच आपसी संवाद यानी पीपुल-टू-पीपुल संपर्क पर बहुत अधिक जोर दिया जा रहा है। संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस यात्रा को लेकर वहां के स्थानीय लोगों और संगठनों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। ब्रिटेन की यात्रा के दौरान 100 से अधिक संगठनों ने सरसंघचालक का स्वागत किया है और उनके सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने में पूरा सहयोग दे रहे हैं। सामुदायिक नेताओं के लिए आयोजित किए जा रहे एक मुख्य कार्यक्रम को तो कुल 310 संगठनों का भारी समर्थन प्राप्त हुआ है।

आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर हो रहा खास आयोजन

यह पूरा दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। ब्रिटेन के स्थानीय संगठन ‘इंटीग्रल’ के विशेष निमंत्रण पर सरसंघचालक वहां पहुंचे हैं। प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार, इस पूरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा आम लोगों और अलग-अलग समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे बातचीत करना है। उनका कहना है कि सरकारों के स्तर पर होने वाली कूटनीतिक बातचीत अपनी जगह पर बहुत जरूरी होती है, लेकिन दो देशों और समाजों के रिश्तों को अंदर से मजबूत बनाने के लिए नागरिकों के बीच सीधा संपर्क होना भी उतना ही आवश्यक है। जब संस्कृति और सभ्यता के स्तर पर रिश्ते मजबूत होते हैं, तो आपसी समझ का दायरा अपने आप बहुत बड़ा हो जाता है।

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संस्कृति और सभ्यता के आधार पर काम करता है संघ

सुनील आंबेकर ने आगे बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा स्वयंसेवी संगठन है जो पूरी तरह से संस्कृति और सभ्यता के आधार पर काम करता है। वैश्विक स्तर पर ऐसे संगठनों की भूमिका बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण हो सकती है। मोहन भागवत का यह ब्रिटेन दौरा केवल सरकारी स्तर के संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘कल्चर-टू-कल्चर’ यानी संस्कृति से संस्कृति के मेल और लोगों से लोगों के जुड़ाव को आगे बढ़ाने का एक बड़ा प्रयास है।

हिंदुत्व की पश्चिमी समझ को लेकर संघ की स्पष्ट बात

जब मीडिया या अन्य लोगों द्वारा हिंदुत्व की पश्चिमी अकादमिक समझ को लेकर सवाल पूछा गया, तो प्रचार प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इसको लेकर पश्चिमी देशों में कई तरह की गलतफहमी और धारणाएं फैली हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश को केवल आज की आधुनिक राजनीतिक राष्ट्र-राज्य की परिभाषा से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता है। भारत की अपनी एक बहुत पुरानी, गहरी और व्यापक सांस्कृतिक पहचान रही है। हिंदुत्व को कभी भी किसी एक सीमित धर्म के दायरे में बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें तो सभी धर्मों और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के प्रति आदर भाव के साथ-साथ सत्य में विश्वास रखने जैसे महान विचार शामिल हैं। संघ को उम्मीद है कि मोहन भागवत की इस ब्रिटेन यात्रा के दौरान होने वाली खुली बैठकों और संवाद से भारत की असली सांस्कृतिक अवधारणा को सही रूप में समझने में बहुत मदद मिलेगी।

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