फिलीस्तीनी कार्टूनिस्ट नाजी अल-अली की हत्या के 39 साल पूरे, हंदला का किरदार आज भी है याद.

Praggya Singh sabal29 August 20262 min read18 viewsWorld
फिलीस्तीनी कार्टूनिस्ट नाजी अल-अली की हत्या के 39 साल पूरे, हंदला का किरदार आज भी है याद.

फिलीस्तीनी राजनीतिक कार्टूनिस्ट Naji al-Ali की हत्या को 39 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर पूरी दुनिया में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। उनका निधन 29 अगस्त 1987 को हुआ था, जब वह लंदन में पांच हफ्ते तक कोमा में रहने के बाद दुनिया से चल बसे। उन पर 22 जुलाई 1987 को कुवैती अखबार Al-Qabas के लंदन दफ्तर के बाहर गोली चलाई गई थी। यह अखबार आइवेस स्ट्रीट पर स्थित था, जहां एक अज्ञात हमलावर ने उन्हें निशाना बनाया था।

हत्या की अनसुलझी गुत्थी और पुरानी यादें

घटना के समय हमलावर के बारे में बताया गया था कि उसकी उम्र लगभग 25 वर्ष थी और वह मध्य-पूर्वी मूल का लग रहा था। उसके बाल घने और काले थे तथा उसने स्टोनवॉश डेनिम जैकेट और काले रंग की पैंट पहनी हुई थी। वारदात के बाद एक दूसरा संदिग्ध व्यक्ति मौके से कार चलाकर फरार हो गया था। जांच अधिकारियों ने घटना में इस्तेमाल की गई 7.62 Tokarev pistol को लगभग दो साल बाद पैडिंगटन से बरामद किया था। इस हत्या के पीछे इजरायली मोसाद और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन यानी PLO पर शक जताया जाता रहा है, लेकिन आज तक हमलावर की असली पहचान और हत्या की असल वजह का खुलासा नहीं हो सका है।

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मेट्रोपोलिटन पुलिस द्वारा मामले की दोबारा जांच

साल 2017 में उनकी मौत की 30वीं वर्षगांठ पर मेट्रोपोलिटन पुलिस की आतंकवाद निरोधक कमान ने इस मामले की फाइल फिर से खोली थी। उस समय कमान का नेतृत्व करने वाले कमांडर Dean Haydon ने बताया था कि समय के साथ बदलते हालातों और रिश्तों के कारण नए गवाह सामने आ सकते हैं। जांचकर्ताओं ने इस मामले में किसी भी तरह के मकसद को लेकर अपना रुख खुला रखा था। ब्रिटिश जांच में बशर समारा नाम के एक संदिग्ध शूटर का नाम सामने आया था, जिसके बारे में कहा गया था कि उसका संबंध पीएलओ से था और वह मोसाद के लिए भी काम कर सकता था, हालांकि इसकी कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई।

हंदला का अमर किरदार

नाजी अल-अली को सबसे ज्यादा उनके बनाए गए मशहूर पात्र Handala के लिए याद किया जाता है। यह एक 10 साल का नंगे पैर रहने वाला शरणार्थी लड़का है, जो फिलिस्तीनी पहचान, संघर्ष और शरणार्थियों के दर्द का प्रतीक बन गया है। इस कलाकार ने खुद कहा था कि हंदला तब तक बड़ा नहीं होगा जब तक फिलिस्तीनी लोग अपने वतन वापस नहीं लौट जाते। उनकी इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए 28 अगस्त 2026 को 'International Virtual Cartoon Exhibition 2026: Handala Never Dies…' की आधिकारिक शुरुआत की गई है, जिसमें उनके काम को पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है।

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