नेपाल बाढ़ पीड़ितों की पहचान के लिए फॉरेसिक एक्सपर्ट्स ने बताए कड़े नियम, INTERPOL के नियमों का हो रहा इस्तेमाल.

Sushma Kumari4 September 20263 min read25 viewsWorld
नेपाल बाढ़ पीड़ितों की पहचान के लिए फॉरेसिक एक्सपर्ट्स ने बताए कड़े नियम, INTERPOL के नियमों का हो रहा इस्तेमाल.

नेपाल बाढ़ में जान गंवाने वालों की पहचान के लिए इंटरनेशनल प्रोटोकॉल लागू

नेपाल में पिछले दिनों आए भीषण भूस्खलन और बाढ़ के बाद मृतकों की पहचान को लेकर फॉरेसिक एक्सपर्ट्स ने बड़े खुलासे किए हैं। फॉरेसिक एंथ्रोपॉलॉजिस्ट Professor Sue Black ने नेपाल के भूते कोशी में आए भयानक सैलाब के पीड़ितों की पहचान के लिए अपनाए जा रहे सख्त इंटरनेशनल मानकों की पूरी जानकारी दी है। यह आपदा 26 अगस्त 2026 को ग्लेशियर फटने की वजह से आई थी, जिसने नेपाल में भारी तबाही मचाई थी। 4 सितंबर 2026 तक इस आपदा में कुल 1,290 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4,700 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 2,847 नेपाली नागरिक और 601 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।

देखकर पहचान करना वैज्ञानिक रूप से गलत

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प्रोफेसर ब्लैक ने इस बात पर जोर दिया कि शवों को सिर्फ चेहरे या शक्ल से पहचानना वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत और असुरक्षित तरीका है। उन्होंने बाली बम धमाकों का पुराना उदाहरण देते हुए बताया कि वहां आधे मामलों में देखकर की गई पहचान गलत साबित हुई थी। इसी गलती से बचने के लिए अधिकारी अब INTERPOL द्वारा बनाए गए Disaster Victim Identification (DVI) फ्रेमवर्क का सख्ती से पालन कर रहे हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप INTERPOL DVI Guidelines पर विजिट कर सकते हैं। इस प्रोटोकॉल में कुल चार चरण शामिल हैं, जिसमें सबसे पहले घटनास्थल की जांच करके शवों को बाहर निकालना, फिर पोस्टमार्टम के दौरान दांत, फिंगरप्रिंट और डीएनए की जांच करना, इसके बाद परिजनों से मिलकर जरूरी जानकारी जुटाना और अंत में एक बोर्ड द्वारा सभी रिपोर्ट की जांच करके कोरोनर के सामने पेश करना शामिल है।

अधिकारियों द्वारा सामूहिक अंतिम संस्कार और डीएनए सैंपलिंग

शवों की बढ़ती संख्या और अस्पताल में जगह की कमी को देखते हुए नेपाल सरकार ने Unidentified and Unclaimed Dead Body Management (First Amendment) Directive, 2026 लागू किया है। इस नियम के तहत किसी भी अज्ञात शव को दफनाने से पहले उसकी फोटो खींचना, फिंगरप्रिंट लेना और डीएनए सैंपल सुरक्षित रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इन सभी अज्ञात शवों को तयशुदा जगहों पर दफनाया जाता है, जिन्हें अगले 12 साल तक नहीं हटाया जा सकता है। वर्तमान समय में कुल 916 शवों को दफनाया जा चुका है, जबकि 1,141 शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। चितवन जिले में स्टोरेज की भारी कमी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने डीएनए सैंपलिंग की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सामूहिक रूप से शवों को दफनाने का काम शुरू कर दिया है।

भारत और चीन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटीं

इस आपदा के बाद नेपाल, चीन और भारत की टीमें मिलकर राहत और बचाव के साथ-साथ फॉरेसिक जांच के काम में जुटी हुई हैं। मेडिकल टीमों ने अब तक कुल 1,862 डीएनए सैंपल सफलतापर्वक इकट्ठा कर लिए हैं। इनमें से 1,143 सैंपल मृतकों के हैं और 719 सैंपल उनके परिवार के जीवित रिश्तेदारों के हैं। भारत सरकार का गृह मंत्रालय यानी Indian Union Ministry of Home Affairs इस काम में पूरी मदद कर रहा है। मंत्रालय ने डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए अपनी नेशनल और स्टेट लेवल की फॉरेसिक लैब के दरवाजे खोल दिए हैं। नेपाल पुलिस इस पूरे अभियान की कमान संभाले हुए है और पहचान की प्रक्रिया को तेज करने के लिए Autosomal STR DNA profiling का इस्तेमाल करने की सलाह दे रही है। आम जनता और पीड़ित परिवारों की मदद के लिए नेपाल पुलिस ने एक हेल्पलाइन नंबर +977 9841 6160 95 और एक ईमेल आईडी dnacodis@nepalpolice.gov.np जारी की है, जिस पर संपर्क करके परिवार के लोग अपने अपनों की जानकारी साझा कर सकते हैं और डीएनए मिलान के लिए डेटा दे सकते हैं। इस बारे में तकनीकी और मेडिकल रिसर्च की अधिक जानकारी के लिए आप NCBI Research Portal पर जा सकते हैं।

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