नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की बाढ़ से भारी तबाही, करीब 5 हजार लोग हुए संपर्कविहीन.

पड़ोसी देश नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है जहां भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ के बाद हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। 29 अगस्त को सामने आई जानकारी के मुताबिक आपदा के तीन दिन बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुल कितने लोग इसकी चपेट में आए हैं और कितने लोग अभी भी लापता चल रहे हैं। नेपाल सरकार के शुरुआती तकनीकी आकलन के अनुसार बाढ़ की इस भयंकर घटना के बाद लगभग 5,000 लोग संपर्कविहीन बताए जा रहे हैं जिससे उनके परिवार वालों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
मोबाइल नेटवर्क और डेटा के आधार पर प्रारंभिक आकलन
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि बाढ़ आने से पहले रसुवा के गोसाईंकुंड इलाके से लेकर नुवाकोट के देवीघाट क्षेत्र तक लगभग 5,000 मोबाइल यूजर एक्टिव थे। लेकिन जैसे ही नदियों में बाढ़ आई उसके बाद से इन सभी नंबरों से संपर्क पूरी तरह टूट गया और किसी से भी बात नहीं हो पाई। नेपाल की दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियों नेपाल टेलीकॉम और एनसेल से मिले डेटा और आंकड़ों के आधार पर ही सरकार ने यह शुरुआती अनुमान लगाया है कि इतने सारे लोग प्रभावित इलाकों में हो सकते हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़े
दूसरी तरफ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल 1,924 लोगों के संपर्कविहीन होने की पुष्ट जानकारी सामने आई है। इन 1924 लोगों में से अकेले 933 लोग ऐसे हैं जो अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं यानी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले कर्मचारी हैं। इसके अलावा बाढ़ और भूस्खलन के कारण संपर्कविहीन होने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या भी लगभग 517 बताई जा रही है हालांकि इन विदेशी नागरिकों के डेटा को लेकर भी अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।
राहत और बचाव कार्य जारी
नेपाल सरकार को शुक्रवार शाम तक लापता और संपर्कविहीन हुए लोगों के संबंध में करीब 2,000 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इन लापता लोगों में रसुवा और नुवाकोट जिलों के स्थानीय नागरिक तो शामिल ही हैं साथ ही वे पर्यटक भी शामिल हैं जो छुट्टियों में गोसाईंकुंड घूमने गए थे। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है और वहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लापता लोगों का पूरा और सही विवरण जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल देश की सरकार और तमाम सुरक्षा एजेंसियां मिलकर प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाश और बचाव अभियान चला रही हैं ताकि जल्द से जल्द स्थिति को संभाला जा सके। प्रशासन की इस समय सबसे पहली प्राथमिकता यही है कि किसी तरह संपर्कविहीन हुए लोगों का पता लगाया जाए, कटे हुए रास्तों को जोड़कर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच दोबारा बहाल की जाए और बाढ़ के पानी में फंसे बेसहारा लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।