नेपाल के बिदुर में बाढ़ का खतरा, अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने का दिया आदेश.

नेपाल के नुवाकोट जिले की राजधानी Bidur में रहने वाले लोगों और राहत कर्मियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया गया है। इलाके में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर बाढ़ आने का खतरा मंडरा रहा है। अल जज़ीरा के रिपोर्टर Barnaby Chuck ने बाढ़ से तबाह हुए शहर से यह जानकारी दी है कि 28 अगस्त 2026 को चेतावनी जारी होने के बाद लोगों को तुरंत वहां से निकाला जा रहा है। यह चेतावनी तिब्बत सीमा की तरफ एक बांध के टूटने की आशंका और त्रिशूली नदी में लगातार बढ़ते पानी के स्तर के कारण दी गई है।
लंकाशरीर राष्ट्रीय पार्क में ग्लेशियर टूटने से मची थी तबाही
यह ताजा संकट 26 अगस्त 2026 को आए उस भयानक हादसे के बाद आया है, जब लंगटांग नेशनल पार्क में एक बड़ा ग्लेशियर टूट गया था। नेपाल नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA और नेपाल पुलिस के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के पास मलबे की वजह से एक खतरनाक झील जैसी स्थिति बन गई थी जिसके टूटने का अब भी बड़ा खतरा बना हुआ है। चीनी अधिकारियों ने तिब्बत में पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है और उन्होंने भी कीचड़ के बहाव से बनी इस कृत्रिम झील को लेकर चेतावनी जारी की है।
राहत और बचाव कार्य में आ रही है भारी रुकावट
जैसे-जैसे खोज और बचाव अभियान चल रहा है, वैसे-वैसे मरने वालों के आंकड़े भी डरा रहे हैं। नेपाल में मरने वालों की संख्या कम से कम 579 तक पहुंच गई है, जबकि आसपास के इलाकों को मिलाकर यह आंकड़ा 584 से ज्यादा हो गया है। अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, इस समय 1,924 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें कई विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं। नेपाल में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस के प्रमुख David Fisher ने बताया कि इस आपदा से 93,000 लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।
सुरक्षा बलों का राहत कार्य और अंतरराष्ट्रीय मदद
नेपाली सेना ने अब तक 3,700 बचे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिसमें अपर त्रिशूली हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट की सुरंग से निकाले गए 350 मजदूर भी शामिल हैं। हालांकि, टूटी हुई सड़कों और पुलों की वजह से राहत सामग्री पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री Balendra Shah और चीन के प्रधानमंत्री Li Qiang ने हालात का जायजा लेने के लिए प्रभावित इलाकों का दौरा किया है। यूरोपियन यूनियन की तरफ से 2 मिलियन यूरो की मदद के साथ-साथ भारत और अमेरिका से भी आपातकालीन सामान पहुंच रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lok Bahadur Chhetri ने कहा कि नेपाल के अपने सुरक्षा बल, जिनमें 14,800 से ज्यादा जवान शामिल हैं, वे इस संकट से निपटने में जुटे हुए हैं। नेपाल सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के अध्यक्ष Bishal Nath Upreti ने बताया कि हालात बेहद खराब हैं और कई जगहों पर केवल हेलीकॉप्टर के जरिए ही पहुंचा जा सकता है।