नेपाल-चीन बॉर्डर पर भयानक बाढ़ और लैंडस्लाइड, लगभग 1500 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी.

Sushma Kumari27 August 20263 min read40 viewsWorld
नेपाल-चीन बॉर्डर पर भयानक बाढ़ और लैंडस्लाइड, लगभग 1500 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी.

नेपाल और चीन की सीमा पर आए भीषण बाढ़ और कीचड़ के सैलाब ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें लगभग 1,500 लोग लापता हो गए हैं। यह प्राकृतिक आपदा 26 अगस्त 2026 को शुरू हुई थी, जब हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान खिसकने से बड़ा हिमस्खलन हुआ। इस वजह से मिट्टी, चट्टान और बर्फ का एक विशाल मलबा ल्हेन्डे नदी में जा गिरा, जिससे निचले इलाकों में चारों तरफ तबाही फैल गई और यह गंभीर संकट पैदा हो गया।

आपदा में हताहतों और लापता लोगों की संख्या

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफ्ले के अनुसार, इस आपदा में नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 353 हो गई है। वहीं नेपाल और चीन के संयुक्त आंकड़ों को देखा जाए तो अब तक कम से कम 273 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल में कुल 826 लोग लापता हैं, जिनमें लगभग 500 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। चीनी सरकारी प्रसारक सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत के जिरोंग काउंटी में 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक हैं। लापता होने वाले लोगों में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री, ट्रेकर्स और दो दर्जन से अधिक देशों के स्थानीय निवासी शामिल हैं। इनमें 177 भारतीय, 63 अमेरिकी, 55 मलेशियाई, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश, 25 कनाडाई और जापान, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका व यूक्रेन के कम से कम पांच-पांच नागरिक शामिल हैं।

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बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान और राहत कार्य

इस आपदा की वजह से इलाके में बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है। कुल 19 पुल और 40 किलोमीटर लंबा हाईवे पूरी तरह नष्ट हो चुका है, जिससे नेपाल सेना और स्थानीय पुलिस द्वारा चलाए जा रहे बचाव कार्यों में काफी रुकावट आ रही है। नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता जीवित बचे लोगों को खोजना है। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की है। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है और दोनों देशों में राहत कार्यों का समर्थन करने की बात कही है। भारत की तरफ से आपातकालीन राहत सामग्री भेजी जा रही है, जबकि कनाडा के अधिकारी अपने प्रभावित नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्बरहम और किंग चार्ल्स तृतीय ने इस दुर्घटना पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

नया खतरा और विशेषज्ञ की राय

राहत और बचाव कार्य के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी बीच, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आपदा स्थल पर एक झील बन गई है जिसके टूटने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। कुछ नेपाली पत्रकारों ने आसपास हो रहे चीनी निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन विशेषज्ञ गुओ झाओचेंग के भूवैज्ञानिक विश्लेषण और प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट इमेज से यह साफ हुआ है कि इस तबाही की मुख्य वजह बड़े पैमाने पर हुआ ग्लेशियर से जुड़ा हिमस्खलन ही था। इस बारे में फिलिपींस न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में भी विस्तृत जानकारी दी गई है।

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