Nepal-China Border Flood: नेपाल और चीन सीमा पर बाढ़ से तबाही, मरने वालों का आंकड़ा पहुंचा 939 के पार.

नेपाल और चीन की सीमा के पास आए भीषण फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 939 हो गई है। बचाव और राहत कार्य आज 31 अगस्त 2026 को अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुके हैं। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA के अनुसार, नेपाल में अभी भी 3,925 लोग लापता हैं और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा तिब्बत यानी चीन में 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिससे इस पूरे इलाके में कुल मरने वालों का आंकड़ा 950 को पार कर गया है। सीमा के दोनों तरफ लगभग 4,400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में प्रशासन जुटा हुआ है।
लापता लोगों में हाइड्रोपावर वर्कर और विदेशी नागरिक शामिल
इस बड़ी आपदा में जो लोग लापता हैं, उनमें रसुवा और नुवाकोट जिलों में चल रही 12 क्षतिग्रस्त परियोजनाओं पर काम करने वाले लगभग 900 हाइड्रोपावर वर्कर शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि इनमें से करीब 500 मजदूर सुरंगों के अंदर फंसे हो सकते हैं। इसके अलावा 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक भी इस आपदा के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस ने देश और विदेश के लापता लोगों के रिश्तेदारों से अपील की है कि वे आगे आएं और बरामद हुए शवों की पहचान करने में मदद के लिए अपने डीएनए सैंपल दें, ताकि सही पहचान हो सके।
आपदा की वजह और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
यह भयानक आपदा 26 अगस्त 2026 को शुरू हुई थी, जब लांगटांग नेशनल पार्क में लांगटांग लिरुंग पर ग्लेशियर टूटने की वजह से ढलान अचानक से गिर गई थी। यह बाढ़ इतनी ज्यादा शक्तिशाली थी कि इसकी वजह से रिक्टर स्केल पर 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा कंपन दर्ज किया गया था। इस आपदा की वजह से पूरे इलाके में बुनियादी ढांचे को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। 40 से ज्यादा पुल पूरी तरह से टूट चुके हैं, कई सड़कें बह गई हैं और ग्योंग पोर्ट बॉर्डर क्रॉसिंग को भी भारी क्षति पहुंची है।
अंतरराष्ट्रीय मदद और जलवायु परिवर्तन की चिंता
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने दुनिया भर के देशों से यह अपील की है कि वे जलवायु परिवर्तन को एक बहुत बड़ा खतरा मानें। उन्होंने बताया कि ऊपरी हिमालय क्षेत्र में ग्लोबल एवरेज रेट से दोगुनी रफ्तार से गर्मी बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टिफेल ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि बढ़ता तापमान इस तरह की घटनाओं को और ज्यादा खतरनाक बना रहा है। हालांकि बीजिंग के विदेश मंत्रालय ने 31 अगस्त 2026 को यह दावा किया था कि उनकी तरफ से दी गई जानकारी पूरी तरह साफ और पारदर्शी रही है, लेकिन इसके बावजूद कई देशों ने तुरंत मदद पहुंचाई है।
भारत सरकार ने तुरंत मानवीय सहायता भेजी है और टनल रेस्क्यू तथा मेडिकल टीमों को भी तैनात किया है। इसके अलावा सिंगापुर ने भी राहत सामग्री, राहतकर्मी और डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन यानी DVI अधिकारियों को बचाव कार्य में मदद के लिए भेजा है, जिसकी जानकारी Singapore MFA के आधिकारिक बयान में दी गई है। नेपाल सरकार इस संकट से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों जैसे कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और कोरिया गणराज्य के साथ लगातार संपर्क में है, जैसा कि Nepal MoFA Updates पर साझा किया गया है। सुरंगों के अंदर फंसे लोगों के लिए ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण अब जीवित बचने की उम्मीदें लगातार कम होती जा रही हैं, जबकि अधिकारी दोबारा बाढ़ आने के खतरे को देखते हुए ऊपरी इलाकों में पानी के बहाव और रुकावटों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।