नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ और भूस्खलन ने मचाई तबाही, वांग यी बोले- यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सीमा पार आपदा.

नेपाल और चीन की सीमा पर हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने हर किसी को हैरान कर दिया है। बुधवार को आए विनाशकारी बाढ़ और भयानक भूस्खलन की वजह से हालात बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं। इस बड़ी त्रासदी को लेकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एक बड़ा बयान दिया है और इसे हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच हुई सबसे गंभीर सीमा पार आपदा बताया है। इस घटना के बाद से राहत और बचाव का काम बहुत तेजी से चलाया जा रहा है, लेकिन हालात इतने मुश्किल हैं कि मदद पहुंचाना आसान नहीं हो रहा है। आने वाले दिनों में लोगों के पुनर्वास के लिए बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत पड़ेगी।
चीनी विदेश मंत्री और नेपाल के विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत
चीनी विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शनिवार को नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के साथ फोन पर लंबी बातचीत की। इस दौरान दोनों बड़े नेताओं ने सीमा क्षेत्र में आए भीषण मलबे के प्रवाह और भूस्खलन से मची तबाही पर विस्तार से चर्चा की। वांग यी ने फोन पर बातचीत के दौरान साफ कहा कि इस समय राहत और आपातकालीन अभियान बहुत ही कठिन परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ रहा है। प्रभावित इलाकों तक जरूरी सामान और मदद पहुंचाने के लिए दोनों देशों को मिलकर बहुत व्यापक प्रयास करने होंगे क्योंकि तबाही का दायरा बहुत बड़ा है।
बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की खबर
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इस आपदा की चपेट में आने से 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश के लिए खोज अभियान लगातार जारी है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के कई हिस्सों में बिजली परियोजनाओं और निर्माण स्थलों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। कई जगहों पर सुरंगों और अलग-अलग प्रोजेक्ट साइटों पर कर्मचारियों के फंसे होने की भी आशंका जताई जा रही है, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है।
भविष्य के लिए मिलकर काम करने की जरूरत
इस भीषण आपदा के बाद नेपाल और चीन दोनों ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया है। दोनों देशों के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा के बाद के पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। इसके साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं से होने वाले नुकसान को कैसे कम किया जाए, इस पर भी गंभीर मंथन किया गया। मौजूदा समय में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए दोनों देशों ने इन मुद्दों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता जताई है। इस पूरी जानकारी की पुष्टि हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से सामने आई है, जिसमें आकाश कुमार राय ने रिपोर्टिंग की है।