नेपाल-चीन सीमा पर ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, पहचान के लिए डीएनए टेस्ट का हो रहा है इस्तेमाल

नेपाल और चीन की सीमा पर आए भयानक ग्लेशियर बाढ़ के एक हफ्ते से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी हालात काफी मुश्किल बने हुए हैं। 26 अगस्त 2026 को हुए इस बड़े हादसे के बाद से राहत और बचाव का काम लगातार जारी है और अब प्रशासन ने शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
अधिकारियों ने जारी किए ताजा आंकड़े
4 सितंबर 2026 तक मिले आंकड़ों के अनुसार नेपाल में नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने 1,290 लोगों की मौत की पुष्टि की है और 4,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं दूसरी तरफ तिब्बत में चीनी अधिकारियों ने 21 लोगों की मौत की पुष्टि की है और लगभग 540 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में अब तक बरामद हुए शवों में से 100 से भी कम शवों की पहचान हो पाई है जिन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।
डीएनए तकनीक क्यों बन गई है जरूरी
कीचड़ और पानी में पड़े रहने और लंबे समय तक धूप व हवा के संपर्क में आने के कारण ज्यादातर शवों की हालत ऐसी हो चुकी है कि उन्हें देखकर पहचानना नामुमकिन हो गया है। ऐसी स्थिति में फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स डीएनए प्रोफाइलिंग का उपयोग कर रहे हैं। वे शवों से बायोलॉजिकल सैंपल लेकर माता-पिता, बच्चों या भाई-बहन जैसे करीबी रिश्तेदारों के सैंपल से मिलान कर रहे हैं। इस वैज्ञानिक तरीके से परिवारों को अपनों के बारे में सही जानकारी मिल रही है और एक ही व्यक्ति के अलग-अलग हिस्सों को मिलाने में भी मदद मिल रही है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव और उठाए जा रहे कदम
नेपाल पुलिस ने लापता पर्यटकों के परिजनों को काठमांडू स्थित पुलिस अस्पताल की लैब या स्थानीय जिला कार्यालयों में ताजा खून के सैंपल और दो पासपोर्ट साइज फोटो जमा करने के निर्देश दिए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने घोषणा की है कि राज्य द्वारा अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करने से पहले उनका डीएनए प्रोफाइल और जरूरी जानकारी सुरक्षित रख ली जाएगी ताकि बाद में पहचान हो सके। शवों के ज्यादा खराब होने, बीमारी फैलने के खतरे और मुर्दाघरों में जगह की कमी के चलते यह फैसला लेना पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही है मदद
नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल छेत्री ने बताया कि सरकार ने अमेरिका, सिंगापुर और चीन जैसे देशों से डीएनए किट, फ्रीजर और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स जैसी विशेष मदद मांगी है। भारत सरकार ने भी भारत में रहने वाले लापता लोगों के रिश्तेदारों के लिए डीएनए टेस्ट की सुविधा और फॉरेंसिक किट मुहैया कराई है। चीन ने ड्रोन और डीएनए टेस्टिंग उपकरणों के साथ अपनी दूसरी राहत टीम भी भेज दी है। इसके बावजूद मोनाश यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड बैस्ड ने चेतावनी दी है कि दुर्गम इलाकों और सीमित संसाधनों के कारण कई पीड़ितों के शव शायद कभी बरामद या पहचाने न जा सकें।