नेपाल ने जलवायु परिवर्तन से तबाही पर मांगा 2 करोड़ डॉलर का मुआवजा, जानिए पूरा मामला.

जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे नेपाल ने अब दुनिया के सामने बड़ा कदम उठाया है और अपनी धरती पर हुई भारी तबाही के बाद आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। पड़ोसी देश नेपाल ने रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे के तौर पर करीब 2 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मांग सामने रखी है। यह पूरा मामला पर्यावरण संतुलन बिगड़ने और उसकी वजह से आम जनता को होने वाली परेशानियों से जुड़ा हुआ है, जिस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र के फंड को भेजा गया आधिकारिक पत्र
नेपाल सरकार ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा के तहत गठित फंड फॉर रिस्पॉन्डिंग टू लॉस एंड डैमेज यानी हानि तथा नुकसान कोष को एक आधिकारिक पत्र भेजा था। इस बेहद महत्वपूर्ण पत्र पर देश के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले और पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने हस्ताक्षर किए हैं। इस बात की जानकारी विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान जनता के साथ साझा की है। विदेश मंत्री ने बताया कि नेपाल ने इस अंतरराष्ट्रीय कोष से शुरुआती तौर पर 20 मिलियन डॉलर की सहायता राशि मांगी है। सरकार का यह भी कहना है कि आपदा के बाद नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है और जल्द ही पूरी स्थिति दुनिया के सामने रखी जाएगी।
ग्रीनहाउस गैसों का कम उत्सर्जन और नेपाल का योगदान
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बेहद कम होता है। इसके बावजूद ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के बुरे प्रभावों का सामना इस पहाड़ी देश को सबसे ज्यादा करना पड़ रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि नेपाल को केवल बाढ़ से हुए नुकसान के एवज में ही राहत नहीं मिलनी चाहिए, बल्कि वैश्विक जलवायु संतुलन को बनाए रखने में उसके सकारात्मक योगदान को देखते हुए भी इस कोष से पूरी मदद मिलनी चाहिए। इस कोष से जुड़े फैसले इसका अंतरराष्ट्रीय बोर्ड करता है, और जानकारों का मानना है कि नेपाल के पक्ष को देखते हुए सहायता मिलने में कोई बड़ी रुकावट नहीं आनी चाहिए।
भोटेकोशी नदी की बाढ़ से मचा था भारी कोहराम
बीते 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके से गुजरने वाली भोटेकोशी नदी में अचानक एक विनाशकारी बाढ़ आई थी। इस भयंकर जलप्रलय ने बड़े पैमाने पर जनधन का भारी नुकसान किया था, जिससे आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह से पटरी से उतर गई थी। बाढ़ के पानी ने घरों, रास्तों और बुनियादी ढांचों को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया था। इसी भारी तबाही के बाद से ही नेपाल सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुआवजे और पुनर्वास के लिए आवाज उठा रही थी, ताकि प्रभावित परिवारों को दोबारा बसाया जा सके और टूटे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से तैयार किया जा सके।