नेपाल आपदा अपडेट: राहत कार्यों के लिए नेपाल ने मांगी तकनीकी मदद, भारत और चीन से भी किया अनुरोध.

नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए सरकार ने मित्र देशों से विभिन्न तकनीकी सहयोग मांगा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 29 अगस्त, 2026 को यह जानकारी दी और स्पष्ट किया कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय बचाव सहायता के प्रस्तावों को कभी अस्वीकार नहीं किया है। सरकार अब बचाव कार्य को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पड़ोसी देशों से विशेष सहायता ले रही है।
विनाशकारी बाढ़ और जान-माल का नुकसान
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ के कारण स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। 29 अगस्त, 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर में कम से कम 579 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 1,900 लोग लापता हैं। इस आपदा में कई विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव टीमों ने अब तक 3,700 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जबकि राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA के अनुसार 4,451 लोगों को बचाया जा चुका है।
फॉरेंसिक क्षमता और डीएनए परीक्षण की आवश्यकता
विदेश मंत्री ने बताया कि रसुवा समेत अन्य जिलों में बरामद हुए शवों की पहचान के लिए नेपाल की मौजूदा फॉरेंसिक क्षमता अपर्याप्त साबित हो रही है। 28 अगस्त, 2026 तक बरामद किए गए 489 शवों में से केवल 100 शवों की पहचान हो पाई है, जबकि 393 शव अज्ञात हैं। इन अज्ञात शवों की सही शिनाख्त करने के लिए डीएनए परीक्षण और आधुनिक रिपोर्टिंग तकनीकों में विदेशी सरकारों से सहयोग मांगा गया है। दुर्गम क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने और फॉरेंसिक क्षमता को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक की सख्त जरूरत है।
पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मदद
नेपाल सरकार ने बचाव कार्यों के विशिष्ट कार्यों के लिए भारत और चीन से विशेष मदद का अनुरोध किया है। विशेष रूप से भोटेकोशी में बाढ़ के कारण बंद हुई सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है। इसके अलावा प्रभावित इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए बेली ब्रिज के निर्माण में भी भारत और चीन से सहायता मांगी गई है। अमेरिका, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के अलावा संयुक्त राष्ट्र ने भी शुरुआती राहत राशि जारी की है, जिससे आपदा पीड़ितों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके।