नेपाल में भयानक बाढ़ का तांडव, 1800 हेक्टेयर फसल बर्बाद और हजारों मवेशियों की मौत

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 11 September 2026 को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन यानी FAO ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के Bhote Koshi–Trishuli river corridor में 26 August 2026 को अचानक भयानक बाढ़ आ गई थी। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई है और हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने ग्रामीण इलाकों के लोगों की आजीविका और खाने-पीने के सामान की सुरक्षा को बहुत बुरी तरह से प्रभावित किया है।
फसलों और खेती को हुआ भारी नुकसान
FAO की उप महानिदेशक Beth Bechdol ने बताया कि इस आपदा में लगभग 1,800 hectares जमीन पर लगी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान धान के खेतों को हुआ है, जिससे लगभग 7,700 tonnes का उत्पादन घाटा हुआ है। बाढ़ का पानी यहीं नहीं रुका, उसने मछलियों के तालाब, सड़क, पुल और बाजारों को भी तहस-नहस कर दिया। इन चीजों के टूटने की वजह से दूध, जानवरों का चारा और खेती से जुड़ी दूसरी जरूरी चीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में बहुत बड़ी रुकावट आ गई है। प्रभावित इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए खेती करना और अपने परिवार का पेट पालना बहुत मुश्किल हो गया है।
मवेशियों की मौत और पशुपालन पर संकट
आपदा की चपेट में कुल 11 नगरपालिकाएं आईं, जहां बड़े पैमाने पर पशुपालन किया जाता था। इन इलाकों में 350,000 से ज्यादा गाय, भैंस, भेड़ और बकरियां थीं, साथ ही करीब 1.6 million यानी सोलह लाख मुर्गियां भी थीं। बाढ़ के पानी में डूबने और ठंड-बीमारी की वजह से इनमें से हजारों जानवरों की मौत हो गई है। FAO के अनुमान के मुताबिक, इन सभी क्षेत्रों में कुल मवेशियों और मुर्गियों की आबादी का 5 to 10 percent हिस्सा खत्म हो चुका है। ग्रामीण इलाकों के लोग अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से इन पशुओं पर निर्भर रहते हैं, ऐसे में मवेशियों की मौत से किसानों की कमर टूट गई है।
सरकार और राहत संगठनों की मदद
मौजूदा हालात से निपटने के लिए FAO नेपाल सरकार के साथ मिलकर तेजी से काम कर रहा है। प्रभावित इलाकों में किसानों को आपातकालीन पशु चिकित्सा सहायता दी जा रही है और सैटेलाइट तस्वीरों तथा जमीन पर जाकर सर्वे के जरिए नुकसान का पूरा हिसाब लगाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को इस समय सबसे ज्यादा जरूरत बीजों, पशुओं के चारे और मेडिकल सेवाओं की है। बाढ़ के बाद गंदे पानी और मलबे की वजह से जानवरों में खतरनाक बीमारियां फैलने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संगठन की तरफ से टीकाकरण, बीमारी के इलाज और लगातार निगरानी पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है ताकि पशुओं की बची हुई आबादी को सुरक्षित बचाया जा सके।