नेपाल बाढ़ का कहर, 102 बच्चों ने खोए माता-पिता और 17 हजार बच्चों को मदद की दरकार

पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भारी बारिश के कारण स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस कुदरती आफत के बाद वहां के बच्चों पर संकट का पहाड़ टूट पड़ा है और उनके सामने भविष्य को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक इस आपदा ने मासूमों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है और अब बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता की जरूरत महसूस की जा रही है। बाढ़ के पानी और मलबे ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिसके बाद सरकार और राहत एजेंसियां लगातार प्रभावितों की मदद में जुटी हैं ताकि हालात को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।
राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद की त्वरित आकलन रिपोर्ट
राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद की तरफ से जारी की गई त्वरित आकलन रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के बाद 102 बच्चों के माता-पिता दोनों लापता बताए जा रहे हैं। इन सभी बच्चों में 49 लड़कियां और 53 लड़के शामिल हैं जो इस आपदा के बाद पूरी तरह अकेले हो गए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक केवल तीन प्रमुख जिलों यानी रसुवा, नुवाकोट और धादिङ में ही कम-से-कम 17 हजार बच्चों को तत्काल संरक्षण और सुरक्षा की सख्त आवश्यकता है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण बच्चों की स्कूली शिक्षा पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है और वे लगातार मानसिक व शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। अपने परिवार से अलग हो चुके और माता-पिता की देखभाल से वंचित इन बच्चों के सामने जोखिम और असुरक्षा का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
अपनों से बिछड़े बच्चे और स्कूलों को नुकसान
सामने आए आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ और भूस्खलन की वजह से कुल 439 बच्चे अपने माता-पिता से बिछड़ गए हैं, जिनमें 222 लड़कियां और 217 लड़के शामिल हैं। इसके अलावा 692 ऐसे प्रभावित बच्चे भी हैं जो फिलहाल अपने माता-पिता या फिर अन्य रिश्तेदारों के साथ सुरक्षित स्थानों पर रह रहे हैं, जिनमें 361 लड़कियां और 331 लड़के हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन सभी प्रभावित बच्चों में 21 बच्चे दिव्यांग भी हैं जिन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है। बाढ़ के कारण कुल 32 स्कूल बुरी तरह प्रभावित हुए हैं जिनमें से 19 स्कूल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन सभी स्कूलों में लगभग 9,400 विद्यार्थी पढ़ाई करते थे जिनमें से 3,928 विद्यार्थी सीधे तौर पर इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार दुर्भाग्यवश 5 विद्यार्थियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि 488 विद्यार्थी अब भी लापता हैं जिनकी तलाश जारी है।
राहत और पुनर्वास के लिए उठाए जा रहे कदम
राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद ने इस पूरी स्थिति को केवल सामान्य राहत का मामला नहीं माना है बल्कि इसे बाल अधिकार, संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और दीर्घकालीन विकास से जुड़ा एक बड़ा मानवीय संकट करार दिया है। राहत कार्य के तहत प्रभावित बच्चों की पहचान करने, उनके परिवारों की तलाश कर पुनर्मिलन कराने, सुरक्षित अस्थायी आश्रय देने और उनकी पढ़ाई लिखाई सुचारू रूप से चलाने पर जोर दिया जा रहा है। परिषद की एक विशेष टीम ने गत 1 से 5 सितंबर के बीच रसुवा, नुवाकोट, धादिङ, गोरखा, तनहुँ और चितवन के विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों, अस्थायी शिविरों और होल्डिंग सेंटरों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। आंकड़ों के अनुसार 5 सितंबर तक बाढ़ प्रभावित जिलों के होल्डिंग सेंटरों में कुल 1,233 बच्चे मौजूद थे, जिनमें 632 लड़कियां और 601 लड़के शामिल थे।
अस्थायी संरक्षण केंद्र और बच्चों की पढ़ाई
प्रशासन की तरफ से बच्चों की देखभाल के लिए स्थानीय बाल अधिकार समितियों के जरिए लगातार प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है ताकि किसी भी बच्चे को असहाय न छोड़ना पड़े। माता-पिता के नहीं मिलने की स्थिति में बच्चों को पहले उनके परिवार के अन्य सदस्यों या फिर नजदीकी रिश्तेदारों के पास रखने की प्राथमिकता दी जा रही है। यदि ऐसा करना मुमकिन नहीं हो पाता है तो फिर कानूनी नियमों के तहत परिवार-आधारित देखभाल या फिर बाल गृह की व्यवस्था की जाएगी ताकि उनका पालन-पोषण सही तरीके से हो सके। ललितपुर जिले के गोदावरी इलाके में प्रभावित बच्चों के लिए एक विशेष अस्थायी संरक्षण केंद्र भी तैयार कर लिया गया है जहां लगभग 50 बच्चों को रखने की पूरी क्षमता मौजूद है। इस केंद्र में बच्चों के इलाज के साथ-साथ मनोसामाजिक परामर्श और शिक्षा की बेहतर व्यवस्था की जा रही है ताकि वे इस मानसिक आघात से जल्द बाहर आ सकें। इसके अलावा काठमांडू के डल्लु स्थित गीतामाता माध्यमिक विद्यालय में भोटेकोशी बाढ़ की वजह से प्रभावित हुए 70 बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू करवा दी गई है जहां उन्हें शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं भी नियमित रूप से दी जा रही हैं।