Nepal Flood Crisis: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, राहत पहुँचाने के लिए नदियों पर बनाए गए जिपलाइन

Aanya3 September 20263 min read33 viewsWorld
Nepal Flood Crisis: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, राहत पहुँचाने के लिए नदियों पर बनाए गए जिपलाइन

नेपाल में ग्लेशियर टूटने की वजह से आई भयानक बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। 26 अगस्त 2026 को हुई इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश में तबाही मचा दी है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सरकार और राहत एजेंसियां लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं ताकि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द जरूरी मदद पहुंचाई जा सके।

मौतों का आंकड़ा और लापता लोगों की तलाश

3 सितंबर 2026 तक आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 हो चुकी है। इसके अलावा 4,200 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश लगातार की जा रही है। सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में भी चीन ने 21 लोगों की मौत और 541 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। देश भर के 34 राहत शिविरों में लगभग 4,000 survivors रह रहे हैं, जिन्हें खाने-पीने की चीजों, दवाइयों और पैसों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी ReliefWeb Report पर देखी जा सकती है।

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टूटी सड़कें और पुल, प्रशासन ने लगाया जिपलाइन

बाढ़ की वजह से सड़कें और पुल पूरी तरह बह चुके हैं जिससे कई गांवों का संपर्क देश के बाकी हिस्से से कट गया है। लोगों और जरूरी सामान की आवाजाही को आसान बनाने के लिए नेपाल सेना और स्थानीय पुलिस ने नुवाकोट जिले के विदुर शहर में उफनती त्रिशूल नदी पर एक अस्थायी जिपलाइन तैयार की है जो 2 सितंबर 2026 तक चालू हो गई थी। अमेरिकी दूतावास की यात्रा चेतावनी के अनुसार, धाडिंग जिले के कृष्णा भीर में पृथ्वी राजमार्ग पूरी तरह बंद है क्योंकि नदी ने लगभग 100 मीटर सड़क को अपने साथ बहा लिया है। इस बारे में पूरी जानकारी U.S. Embassy Travel Alert पर उपलब्ध है।

स्वास्थ्य सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय मदद

नेपाल के आपदा प्रमुख धर्म राज उप्रेती ने बताया कि बीमारियों के खतरे को रोकने के लिए हर राहत शिविर में डॉक्टरों और दवाइयों से लैस स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। हालांकि इसके बावजूद लोगों को अपनी खास जरूरतों को पूरा करने में दिक्कत आ रही है। उदाहरण के लिए, नुवाकोट के देवीघाट इलाके में रहने वाले सुरेश कुमार करणजीत को अपनी दिल की दवाई खरीदने के लिए राहत में मिले नूडल्स तक बेचने पड़े। नेपाली सरकार ने 15 नगर पालिकाओं में बाढ़ आपातकाल घोषित कर दिया है और 2 अन्य प्रभावित नगर पालिकाओं की भी पहचान की है।

यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम 22,000 बच्चों को साफ पीने के पानी, स्वच्छता और सेहत से जुड़ी चीजों के लिए तुरंत मदद की जरूरत है। संस्था ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में 19,000 लोगों की मदद के लिए राहत सामग्री भेजी है जिसमें हाइजीन किट, जेरीकैन, बाल्टी और पानी साफ करने के उपाय शामिल हैं। इसके अलावा भारत, चीन और अमेरिका की विशेष खोज और बचाव टीमें त्रिशूल और भोटे कोसी नदियों के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट टनल में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार काम कर रही हैं। इस राहत अभियान से जुड़ी अन्य जानकारियां U.S. Embassy Update पर दी गई हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी और राहत कार्य

सरकार ने ट्रक, जीप और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करके राहत सामग्री पहुँचाने के लिए 20,000 से ज्यादा कर्मचारियों को मैदान में उतारा है। जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि 5 सितंबर तक देश भर में आंधी और बारिश जारी रहने की संभावना है, खासकर पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश से और अधिक लैंडस्लाइड का खतरा बना हुआ है। जिन लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है, उनके परिवारों ने अब उनकी वापसी की उम्मीद छोड़ते हुए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है।

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